मद्रास हाईकोर्ट ने अजित कुमार हिरासत मौत मामले में चार पुलिसकर्मियों की रिमांड के खिलाफ याचिका खारिज की
मदुरै, 4 नवंबर (आईएएनएस)। मंदिर के सुरक्षा गार्ड बी. अजित कुमार की सनसनीखेज हिरासत में मौत के मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने बुधवार को चार पुलिसकर्मियों द्वारा अपनी न्यायिक रिमांड को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और निचली अदालत को नौ महीने के भीतर कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया।
अदालत का यह आदेश 29 वर्षीय सुरक्षा गार्ड की मौत की जांच की निरंतर निगरानी के बीच आया है, जिसे कथित तौर पर जून 2025 में पुलिस पूछताछ के दौरान घातक चोटें आई थीं।
इस मामले ने हिरासत में हिंसा को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा किया था और तमिलनाडु सरकार को जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के लिए प्रेरित किया था।
न्यायमूर्ति मुरुगन ने मनमदुरै के पूर्व पुलिस उप अधीक्षक इन. शन्मुगसुंदरम, तिरुप्पुवनम के पूर्व इंस्पेक्टर एसपी रमेश कुमार, विशेष सब-इंस्पेक्टर एस. शिवकुमार और हेड कांस्टेबल जी. इलैयाराजा द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।
इन चारों अधिकारियों ने मदुरै स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के 16 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या सहित 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप तय करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे लगातार निचली अदालत के समक्ष पेश हुए, जांचकर्ताओं के साथ सहयोग किया और पहले गिरफ्तारी से न्यायिक सुरक्षा प्राप्त कर चुके थे।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी बाद की रिमांड अनुचित थी।
हालांकि, अजित कुमार के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने उनकी रिहाई का विरोध करते हुए चिंता जताई कि आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और मुकदमे में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
मदपुरम भद्रकाली अम्मन मंदिर में कार्यरत अजित कुमार की 28 जून, 2025 को एक कथित आभूषण चोरी की जांच कर रही विशेष पुलिस टीम द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद मृत्यु हो गई।
सीबीआई ने 20 अगस्त, 2025 को छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद 12 दिसंबर को चार अतिरिक्त अधिकारियों को नामजद करते हुए एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया।
निचली अदालत ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने सबूतों को दबाने के लिए पुलिस रिकॉर्ड में हेराफेरी की, जनरल डायरी की प्रविष्टियों में बदलाव किया और मोबाइल फोन नष्ट कर दिए।
जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि शन्मुगसुंदरम ने स्थानीय राजनीतिक मध्यस्थों के माध्यम से पीड़ित के माता-पिता के साथ समझौता करने का प्रयास किया।
अभियोजन पक्ष ने अहम गवाह अजीत कुमार के भाई नवीन कुमार को दी गई पुलिस सुरक्षा वापस लेने पर भी चिंता जताई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने रिमांड को बरकरार रखा, जिससे नौ महीने की समय सीमा के भीतर मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया।
--आईएएनएस
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