केरल: गांधी परिवार पर टिप्पणी से गरमाया राजनीतिक माहौल, भड़का विपक्ष
तिरुवनंतपुरम, 3 फरवरी (आईएएनएस)। मंगलवार को केरल में राजनीतिक माहौल तब गरमा गया जब विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने पिनारयी विजयन सरकार के मंत्रियों पर विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का बार-बार अपमान करने का आरोप लगाया। सतीशन का आरोप है कि ये टिप्पणियां चुनाव से पहले भाजपा के राजनीतिक आधार को लुभाने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा थीं।
यह तीखी आलोचना राज्य के आबकारी मंत्री एमबी राजेश के बयान के बाद शुरू हुई, जिन्होंने कथित तौर पर दावा किया था कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में संशोधन के बाद प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री के साथ चाय पीने गई थीं।
सतीशन ने इस बयान को निराधार और कैबिनेट मंत्री के लिए अशोभनीय बताते हुए उन पर विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का स्तर गिराने का आरोप लगाया।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि राजेश ने पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंधों का दावा किया था और सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरें साझा की थीं।
ठाकुर को दिल्ली दंगों के दौरान की गई विवादास्पद टिप्पणियों के लिए अतीत में आलोचना का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने उस जुड़ाव पर गर्व व्यक्त करने और प्रियंका गांधी को निशाना बनाने के बीच के विरोधाभास को घोर पाखंड बताया।
राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों पर भी सोनिया गांधी के बारे में बार-बार अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया।
सतीशन के अनुसार, ऐसी टिप्पणियां कोई छिटपुट घटना नहीं थीं, बल्कि विवाद पैदा करने और जनमत को ध्रुवीकृत करने के उद्देश्य से किए गए एक सुनियोजित कृत्य का हिस्सा थीं।
सतीशन ने दावा किया कि गांधी परिवार पर बार-बार हमले भाजपा का समर्थन हासिल करने और उसके मतदाताओं को आकर्षित करने की एक सोची-समझी रणनीति थी।
उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन द्वारा किए जा रहे निम्न स्तर के दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए निरंतर राजनीतिक अभियान चलाएगी।
विवाद को व्यापक मुद्दों से जोड़ते हुए, सतीशन ने सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में कार्रवाई की मांग को दोहराया।
आरोप-प्रत्यारोप ने राज्य में राजनीतिक विभाजन को और गहरा कर दिया है।
विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, विधानसभा और उससे बाहर टकराव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि पार्टियां अपने मुख्य समर्थकों को एकजुट करने के साथ-साथ अनिर्णायक मतदाताओं को लुभाने के लिए अलग-अलग रणनीति अपना रही हैं।
--आईएएनएस
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