सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी कमाई से शिक्षण संस्थान बनाने के लिए दान देने पर शिक्षकों की तारीफ की
गुवाहाटी, 31 जुलाई (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को अपने पूर्व शिक्षक डॉ. नंदिता भट्टाचार्य गोस्वामी और डॉ. पन्नालाल गोस्वामी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शिक्षण संस्थान स्थापित करने के मकसद से अपनी जीवन भर की कमाई समर्पित करने के उनके फैसले की सराहना की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने इस जोड़े को एक सच्ची विरासत की मिसाल बताया और कहा कि उनका नि:स्वार्थ योगदान आने वाले सालों में अनगिनत छात्रों को प्रेरित और शिक्षित करता रहेगा।
सीएम सरमा ने लिखा, "हम अक्सर विरासत की बात करते हैं। बहुत कम लोग ही इसे इतने सार्थक ढंग से जीते हैं।"
सीएम सरमा ने पोस्ट में कहा, "जाने-माने शिक्षाविद और मेरे सम्मानित शिक्षक डॉ. नंदिता भट्टाचार्य गोस्वामी और डॉ. पन्नालाल गोस्वामी ने अपनी जीवन भर की कमाई एक ऐसा संस्थान बनाने में लगा दी है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित और शिक्षित करेगा।"
इन प्रतिष्ठित शिक्षकों के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "उनके छात्र के तौर पर मैं बहुत विनम्र महसूस कर रहा हूं। उन्होंने दिखाया है कि ज्ञान से बड़ी कोई विरासत नहीं होती।"
मुख्यमंत्री सरमा की बातों ने इस शिक्षाविद दंपत्ति के शानदार योगदान की ओर ध्यान खींचा है। अपनी जीवन भर की कमाई को शिक्षा में लगाने के उनके फैसले की, क्लासरूम से बाहर जन-सेवा के एक उदाहरण के तौर पर काफी तारीफ की गई है।
मुख्यमंत्री ने इन दोनों शिक्षाविदों का एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें आने वाली पीढ़ियों को संवारने के लिए समर्पित एक संस्थान बनाने के उनके विजन को दिखाया गया है।
यह वीडियो इस बात पर जोर देता है कि शिक्षा ही वह सबसे स्थायी विरासत है जिसे कोई व्यक्ति अपने पीछे छोड़ सकता है। यह सम्मान ऐसे समय में दिया जा रहा है जब असम संस्थागत विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के जरिए अपने शिक्षा तंत्र को मजबूत करने पर अधिक जोर दे रहा है।
मुख्यमंत्री सरमा का अपने शिक्षकों के योगदान को स्वीकार करना, उन शिक्षकों के प्रति राज्य की निरंतर मान्यता को दर्शाता है जिन्होंने ज्ञान और सेवा के माध्यम से समाज को आकार देने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।
--आईएएनएस
ओपी/डीकेपी
