दिल्ली में वाम नेताओं की हिरासत के खिलाफ तमिलनाडु में प्रदर्शन, जिला मुख्यालयों पर उतरेगा वाम मोर्चा
चेन्नई, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। वामपंथी दलों ने शनिवार को तमिलनाडु के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शनों का आह्वान किया। उन्होंने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की।
संयुक्त बयान में राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों ने बल प्रयोग किया। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया और अपने समर्थकों से तत्काल विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन की अपील की।
यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा वामपंथी दलों और जन संगठनों के समर्थन से बुलाया गया था। इसमें कुमार के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान के बीच उन्हें हटाने की मांग की गई थी। प्रदर्शन से पहले अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी में व्यापक प्रतिबंध लगा दिए थे।
बयान के अनुसार, दिल्ली में गिरफ्तार किए गए लोगों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव डी. राजा और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेता शामिल थे।
पार्टियों ने आरोप लगाया कि युवा और छात्र संगठनों के नेताओं, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। कई बंदियों को घंटों तक पुलिस वाहनों में रखा गया और गिरफ्तारियों और हिरासत में लिए गए लोगों के साथ किए गए व्यवहार दोनों की आलोचना की गई।
पार्टियों ने आरोप लगाया कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने विभिन्न स्थानों पर समूहों को इकट्ठा होने से रोका और प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया।
उन्होंने कार्यकर्ताओं की आवाजाही को प्रतिबंधित करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा राजनीतिक दलों और जन संगठनों के कार्यालयों को घेरने का भी आरोप लगाया।
बयान में दावा किया गया कि दिल्ली जाने वाली 254 ट्रेनें रद्द कर दी गईं, 54 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और 35,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इन उपायों को दलों ने विरोध प्रदर्शन में भागीदारी को बाधित करने के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान का सबूत बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों की अनदेखी की है और तर्क दिया कि सुरक्षा व्यवस्था नागरिकों के इकट्ठा होने और असहमति व्यक्त करने के लोकतांत्रिक अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती।
वामपंथी दलों ने कहा कि दिल्ली पुलिस के आचरण और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने तमिलनाडु भर में पार्टी इकाइयों और संबद्ध संगठनों से अपील की कि वे इस कार्रवाई के विरोध में जिला मुख्यालयों पर एकजुट हों और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को दोहराएं।
संयुक्त बयान के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शनों से दिल्ली की कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन राज्यभर के जिला केंद्रों तक फैलेगा।
--आईएएनएस
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