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दिल्ली में 'लॉरेंस बिश्नोई गैंग' के शूटर गिरफ्तार, टारगेटेड किलिंग की रच रहे थे साजिश

नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस के रोहिणी जिला स्पेशल स्टाफ ने रविवार को तीन शूटरों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इन शूटरों के तार कथित तौर पर 'लॉरेंस बिश्नोई-हरी बॉक्सर गैंग' से जुड़े थे और वे एक टारगेटेड किलिंग की साजिश रच रहे थे।
 

नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस के रोहिणी जिला स्पेशल स्टाफ ने रविवार को तीन शूटरों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इन शूटरों के तार कथित तौर पर 'लॉरेंस बिश्नोई-हरी बॉक्सर गैंग' से जुड़े थे और वे एक टारगेटेड किलिंग की साजिश रच रहे थे।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी टारगेटेड किलिंग के लिए राजधानी में कई जगहों की रेकी कर रहे थे और उन्हें विदेश में मौजूद एक नेटवर्क से जानकारी मिल रही थी, जिसके बाद उन्हें इस अपराध को अंजाम देना था।

बताया जा रहा है कि वे दिल्ली में कई घटनाओं में वांछित थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रणदीप मलिक, हरि बॉक्सर और अनिल पंडित के तौर पर हुई है।

रोहिणी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीएसपी) शशांक जायसवाल ने आईएएनएस से ​​बात करते हुए कहा, "रणदीप मलिक, हरि बॉक्सर और अनिल पंडित गैंगस्टरों के कहने पर काम कर रहे थे और उनके लिए रेकी भी करते थे।"

डीएसपी ने बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनमें से एक को पहले 2024 में हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने कहा, "वह जेल से रिहा हुआ था और अपराध करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ऐसा करने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।"

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने रंगदारी की मांग भी की थी। जायसवाल ने कहा, "रणदीप मलिक ने शुरू में एक करोड़ रुपए की मांग की थी, जिसे बाद में हरि बॉक्सर ने बढ़ा दिया था।"

हालांकि, पुलिस अधिकारी ने कहा, "आरोपियों के लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध हैं या नहीं, यह जांच का विषय है।"

हाल ही में, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने अमेरिका की अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़ा ऑपरेशन चलाया और 20 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया।

'ऑपरेशन हार्ड बॉल' नाम के इस अभियान में लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क को निशाना बनाया गया। इसका मकसद उस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट के मुख्य गुटों को खत्म करना था, जो कथित तौर पर उत्तरी अमेरिका और भारत में समुदायों को प्रभावित करने वाली आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। यह कार्रवाई अमेरिका में नेटवर्क की गतिविधियों से जुड़ी थी।

इस ऑपरेशन में मुख्य रूप से नेटवर्क की गैर-कानूनी गतिविधियों को निशाना बनाया गया, लेकिन एक अहम बात यह सामने आई कि खालिस्तानी ऑपरेटिव हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला।

एक अधिकारी ने कहा कि इस ताजा कार्रवाई से भारत का पक्ष सही साबित होता है कि 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जो आरोप लगाए थे कि निज्जर की हत्या में भारत की भूमिका थी, उनमें कोई ठोस आधार नहीं था।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी