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नृपेंद्र मिश्रा ने 1992 के अयोध्या मामले का किया जिक्र, बोले-राजनीतिक नेतृत्व लेता है अहम फैसले

अयोध्या, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने से जुड़ी घटनाओं पर बात करते हुए शनिवार को कहा कि ऐसी स्थितियों में अहम फैसले ज्यादातर नौकरशाहों के बजाय राजनीतिक नेतृत्व की ओर से लिए जाते हैं।
 
नृपेंद्र मिश्रा ने 1992 के अयोध्या मामले का किया जिक्र, बोले-राजनीतिक नेतृत्व लेता है अहम फैसले

अयोध्या, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने से जुड़ी घटनाओं पर बात करते हुए शनिवार को कहा कि ऐसी स्थितियों में अहम फैसले ज्यादातर नौकरशाहों के बजाय राजनीतिक नेतृत्व की ओर से लिए जाते हैं।

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि 1992 में अयोध्या में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाने की रिपोर्टों के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने साफ निर्देश दिए थे कि पुलिस 'कारसेवकों' पर गोली न चलाए।

उन्होंने अलग-अलग सरकारों के अधीन अपने कार्यकाल का भी जिक्र किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव का कार्यकाल भी शामिल है। उन्होंने संकट के समय इन दोनों नेताओं की ओर से अपनाए गए अलग-अलग रवैयों में मौजूद अंतर को भी बताया।

शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि इस तरह के फैसले मुख्य सचिव के स्तर पर नहीं लिए जाते। ऐसे लगभग 90 प्रतिशत फैसले राजनीतिक होते हैं और 10 प्रतिशत फैसलों में गृह सचिव, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मिले सुझावों को शामिल किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि मैंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह, दोनों के ही मुख्य सचिव के तौर पर काम किया है। आपको भी पता होगा कि जब कल्याण सिंह के सामने यह रिपोर्ट पेश की गई थी कि अयोध्या में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है, तो उन्होंने लिखित आदेश दिया था कि इस पवित्र नगरी में किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं होगी।

नृपेंद्र मिश्रा ने ये बातें अयोध्या में पहले हुई गोलीबारी के संदर्भ में कीं, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चलाई थीं, उस समय विश्व हिंदू परिषद की 'कार सेवा' के हिस्से के तौर पर बड़ी संख्या में भगवान राम के भक्त अयोध्या में इकट्ठा हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, निहत्थे कारसेवकों पर पुलिस की गोलीबारी में 28 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बाद में कहा था कि यह कार्रवाई उनके आदेश पर की गई थी, और उन्होंने इसे विवादित ढांचे की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए जरूरी बताते हुए सही ठहराया था।

इसके विपरीत, 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को गिराए जाने के दौरान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने निर्देश दिया था कि हालात बेहद तनावपूर्ण होने के बावजूद कारसेवकों पर गोली न चलाई जाए।

कहा जाता है कि कल्याण सिंह ने कहा था कि एक इमारत के लिए कारसेवकों पर गोली नहीं चलाई जाएगी और बाद में 6 दिसंबर 1992 की शाम को विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

नृपेंद्र मिश्रा की ये बातें अयोध्या के इतिहास की दो सबसे महत्वपूर्ण और विवादित घटनाओं के दौरान अलग-अलग प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर हैं। साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में राजनीतिक निर्णय-लेने की प्रमुख भूमिका को लेकर भी हैं।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी