अटलांटा में लावरोव की मौजूदगी से जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में मतभेद, रूस को लेकर पश्चिमी देशों में दरार
अटलांटा, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मौजूदगी ने पश्चिमी देशों के बीच मॉस्को के साथ संबंधों को लेकर बढ़ते मतभेदों को उजागर कर दिया है। इससे अमेरिका की मेजबानी में हो रही इस बैठक में आर्थिक मुद्दों पर साझा सहमति बनने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित इस दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। यह बैठक दिसंबर में मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में होने वाले जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह इसमें शामिल होंगे या नहीं।
लावरोव की मौजूदगी ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि यूक्रेन में युद्ध जारी रहने के बीच अंतरराष्ट्रीय बैठकों में रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत करना क्या मॉस्को के साथ सामान्य संबंधों की वापसी का संकेत है।
जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा कि वह सभी प्रतिभागियों के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाने से परहेज नहीं करेंगे, क्योंकि संवाद उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक युद्ध जारी है, रूस के साथ संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के एसोसिएट फेलो निकोलस लॉकर ने रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी (आरएफई/आरएल) से कहा कि यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के शुरुआती वर्षों में अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी मॉस्को के साथ सामान्य संबंध बहाल करने के खिलाफ एकजुट थे। इसमें सामान्य कूटनीतिक बातचीत के जरिए रूस को वैधता देने से बचना भी शामिल था। उन्होंने कहा कि अब यह सहमति टूट चुकी है।
यह मतभेद पहले भी सामने आ चुका है। अगस्त में उत्तरी कैरोलिना के एशविले में हुई जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान यूरोपीय प्रतिनिधियों ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के साथ द्विपक्षीय बैठक पर आपत्ति जताई थी। लॉकर के मुताबिक, यूरोपीय प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया था कि सिलुआनोव को उस बैठक की सामूहिक तस्वीर में शामिल नहीं किया जाए।
इस बार यूक्रेन की गैरमौजूदगी ने भी विवाद बढ़ा दिया है। वाशिंगटन ने औपचारिक जी-20 सदस्य देशों तक ही निमंत्रण सीमित रखे, जिसके कारण यूक्रेन को अतिथि सूची में जगह नहीं मिली। सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी एनालिसिस के वरिष्ठ फेलो जेम्स लैमोंड ने कहा कि लावरोव की मौजूदगी और यूक्रेन के प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति में यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर ठोस चर्चा करना मुश्किल होगा। उन्होंने आरएफई/आरएल से कहा, "यूक्रेन की मौजूदगी के बिना किसी भी ठोस मुद्दे पर बातचीत नहीं की जा सकती।"
लैमोंड के मुताबिक, बैठक में यूक्रेन और ईरान के युद्ध का मुद्दा छाया रह सकता है। ऐसे में विदेश मंत्रियों के लिए जी-20 की आर्थिक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होगा। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि वह जी-20 को उसके मूल एजेंडे की ओर वापस ले जाना चाहता है। इसमें आर्थिक विकास, विनियमन में ढील, नवाचार, ऊर्जा और व्यापार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है।
इस बीच, मॉस्को ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि रूसी प्रतिनिधिमंडल के वीजा से जुड़ी प्रक्रिया आखिरी समय में पूरी हुई। आरएफई/आरएल की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन में हर कोई लावरोव की भागीदारी से खुश नहीं है। लावरोव ने कहा है कि वह इस बैठक का इस्तेमाल वैश्विक आर्थिक संस्थानों में सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए करेंगे। बैठक के समापन पर विदेश मंत्रियों की ओर से संयुक्त बयान जारी होगा या अमेरिका अध्यक्षीय सारांश जारी करेगा, इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अटलांटा में रुबियो और लावरोव के बीच द्विपक्षीय बैठक की भी अभी तक घोषणा नहीं की गई है।
--आईएएनएस
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