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जमीन के बदले नौकरी का मामला: दिल्ली अदालत में सुनवाई के बाद लालू प्रसाद पटना लौटे

पटना, 10 जनवरी (आईएएनएस)। जमीन के बदले नौकरी के मामले में दिल्ली की अदालत में हुई सुनवाई के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव शनिवार को पटना लौट आए।
 
जमीन के बदले नौकरी का मामला: दिल्ली अदालत में सुनवाई के बाद लालू प्रसाद पटना लौटे

पटना, 10 जनवरी (आईएएनएस)। जमीन के बदले नौकरी के मामले में दिल्ली की अदालत में हुई सुनवाई के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव शनिवार को पटना लौट आए।

उनके साथ उनकी सबसे बड़ी बेटी और पाटलिपुत्र की लोकसभा सांसद मीसा भारती भी थीं।

पटना हवाई अड्डे पर पहुंचने पर मीसा भारती ने मीडियाकर्मियों से संक्षिप्त बातचीत की और बताया कि जमीन के बदले नौकरी के मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी, जिसमें औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे।

लाल प्रसाद यादव आंखों के इलाज के लिए एक महीने से अधिक समय से दिल्ली में रह रहे थे। 20 दिसंबर, 2025 को दिल्ली के सेंटर फॉर साइट में उनका मोतियाबिंद और रेटिना का ऑपरेशन सफलतापूर्वक हुआ था।

ऑपरेशन के बाद वे राजधानी में मीसा भारती के आधिकारिक आवास पर आराम कर रहे थे।

राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत के एक महत्वपूर्ण फैसले ने राजद के भीतर नए सिरे से राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है।

जमीन के बदले नौकरी घोटाले में अदालत ने लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।

अदालत ने लालू प्रसाद यादव पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है।

अदालत के इस आदेश के बाद सत्ताधारी जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

जदयू नेता और प्रवक्ता नीरज कुमार ने शुक्रवार को लालू परिवार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे एक आपराधिक राजनीतिक गिरोह चला रहे थे और उन्होंने बिहार में समाजवादी आंदोलन की विरासत को धूमिल किया है।

उन्होंने कहा कि अदालत का यह आदेश परिवार के कृत्यों का स्वाभाविक परिणाम है और मामले के शीघ्र निपटारे की अपील की।

नीरज कुमार ने लालू परिवार की संपत्तियों को जब्त करने की भी मांग की।

उन्होंने सुझाव दिया कि जब्त की गई जमीनों पर अनाथालय, वृद्धाश्रम और अत्यंत पिछड़े वर्गों के लिए छात्रावास बनाए जाएं। उनका कहना था कि ऐसा करने से एक सशक्त सामाजिक मिसाल कायम होगी और यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि राजनीति कोई व्यवसाय नहीं है और भ्रष्टाचार के गंभीर परिणाम होंगे।

--आईएएनएस

एमएस/