केवीआईसी ने हनी मिशन के जरिए 2.46 लाख मधुमक्खी बक्से और कॉलोनियों का वितरण किया
नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के हनी मिशन और इससे जुड़ी योजनाओं के तहत वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच देशभर में करीब 2.46 लाख मधुमक्खी बक्से और मधुमक्खी कॉलोनियां वितरित की हैं। इससे 2025-26 में लगभग 5,500 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के तहत आने वाला खादी और ग्रामोद्योग आयोग प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बेहतर उपकरण एवं तकनीक, बाजार सहयोग और अन्य उपायों के जरिए इस बदलाव को समर्थन दे रहा है।
बयान में आगे कहा गया कि वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन और मूल्यवर्धित शहद उत्पादों से लेकर वेटिवर आधारित उद्यमों तथा केले के रेशे से बने उत्पादों तक, ग्रामीण उद्यमी यह दिखा रहे हैं कि स्थानीय ज्ञान को किस तरह लाभदायक कारोबार और आजीविका के अवसरों में बदला जा सकता है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के बयान के अनुसार, खादी विकास योजना (केवीवाई), ग्रामोद्योग विकास योजना (जीवीवाई) और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) जैसी पहलों के माध्यम से पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्यमिता क्षमताओं के साथ मजबूत किया जा रहा है। इससे कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को टिकाऊ आजीविका के साधन विकसित करने में मदद मिल रही है।
हनी मिशन के तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण के साथ मधुमक्खी के बक्से, जीवित मधुमक्खी कॉलोनियां और संबंधित टूलकिट उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे वे मधुमक्खी पालन शुरू कर धीरे-धीरे इसे आय के स्रोत के रूप में विकसित कर सकते हैं।
भारत की मधुमक्खियों का पालन तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों सहित कई राज्यों में मधुमक्खी पालकों द्वारा किया जाता है।
मंत्रालय ने व्यक्तिगत सफलता की कहानियों के बारे में बताया। तमिलनाडु के कन्याकुमारी में टी. अजिन ने मार्थंडम हनी प्रोडक्ट्स की स्थापना की है, जहां एगमार्क प्रमाणित शहद और सूखे मेवों से मिश्रित शहद का उत्पादन किया जाता है। इससे पारंपरिक मधुमक्खी पालन में मूल्यवर्धन हो रहा है।
अजिन किसानों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) समुदायों के लोगों को आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीकों का प्रशिक्षण भी देते हैं। उन्होंने राज्य, क्षेत्रीय और जिला स्तर के कार्यक्रमों में भी भाग लिया है। इसके अलावा, उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से भी अपना ज्ञान साझा किया है।
बयान में कहा गया कि एक अन्य उद्यमी एम. मुरुगेसन ने केले के रेशे को आकर्षक और उपयोगी सजावटी वस्तुओं में बदल दिया। उनके इस काम के लिए उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों से पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
--आईएएनएस
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