तमिलनाडु : कुलसेकरापट्टिनम दशहरा के लिए तैयार, भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम
थूथुकुडी, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु का कुलसेकरपट्टिनम 20 अक्टूबर को भक्तों के जमावड़े के लिए तैयार हो रहा है। इस दिन यहां के समुद्र तट पर 'सूरसंहारम' अनुष्ठान होगा, जो मुथारम्मन मंदिर में मनाए जा रहे दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा।
इस उत्सव में पूरे दक्षिण भारत से तीर्थयात्री और पर्यटक आते हैं। यहां 'सूरसंहारम' के दौरान लगभग आठ लाख लोग इकट्ठा होते हैं और 11 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में 12 लाख से अधिक लोग मंदिर के दर्शन करने आते हैं। इस साल के उत्सव की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई।
मुख्य कार्यक्रम से पहले प्रशासन ने सुरक्षा, साफ-सफाई और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम बढ़ा दिए हैं। हालांकि, तटीय गांव में संकरी सड़कें और बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
भीड़, ट्रैफिक और परिवहन व्यवस्था को संभालने के लिए 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। निगरानी के लिए 90 स्थायी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और उत्सव के दौरान 175 अतिरिक्त कैमरे अस्थायी रूप से लगाए गए हैं।
मंदिर, समुद्र तट और पार्किंग क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की देखरेख तीन संयुक्त आयुक्त कर रहे हैं। मंदिर और समुद्र तट तक पहुंचने के रास्ते को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं के बाहर निकलने के लिए दो नई सड़कें बनाई जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए बेहतर तालमेल की जरूरत होती है, खासकर पीने के पानी, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधा और समुद्र तट पर होने वाले अनुष्ठान के बाद लोगों के सुरक्षित रूप से वहां से जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए।
स्थानीय निकाय और मंदिर प्रशासन पीने के पानी की व्यवस्था कर रहे हैं, साथ ही 175 स्थायी और 180 अस्थायी शौचालय भी उपलब्ध कराए गए हैं। उत्सव के दौरान पंचायत की सफाई टीमों की मदद के लिए 200 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि जरूरी सुविधाओं की निगरानी की जा रही है और लोगों की भारी भीड़ की जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा रहा है।
इस उत्सव से ग्राम पंचायत को राजस्व मिलता है, लेकिन अधिकारियों ने माना कि बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए बेहतर सड़कें और ठहरने की जगहें होनी चाहिएं। आधिकारिक सूत्रों ने 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' का हवाला देते हुए बताया कि 2018 में 'सूरसंहारम' में आठ लाख श्रद्धालु शामिल हुए थे।
इस बीच उत्सव समिति इस आयोजन को यूनेस्को की 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' के रूप में मान्यता दिलाने का प्रयास कर रही है। वे इस उत्सव के पारंपरिक महत्व, कलात्मक अभिव्यक्ति और पर्यटन की दृष्टि से इसके आकर्षण को उजागर कर रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि मान्यता पाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा, और इससे उत्सव की सांस्कृतिक पहचान और भी मजबूत होगी।
राजस्व अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को इस उत्सव को आधिकारिक रूप से अधिसूचित करना चाहिए और तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर के उत्सवों की तरह, इसके आयोजन को जिला प्रशासन की देखरेख में लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे वार्षिक आयोजन के दौरान भीड़ को संभालने और जरूरी सेवाएं मुहैया कराने वाले विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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