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केटीआर ने रेवंत रेड्डी की कथित ‘बेनामी’ फर्म की जांच की मांग की

हैदराबाद, 4 फरवरी (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कथित 'बेनामी' कंपनी की जांच की मांग की।
 

हैदराबाद, 4 फरवरी (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कथित 'बेनामी' कंपनी की जांच की मांग की।

केटीआर ने प्रेस वार्ता कर दावा किया कि केएलएसआर मुख्यमंत्री के लिए एक मुखौटे के रूप में काम करती है और उन्होंने अपने दावों का समर्थन करने के लिए सबूत होने का भी दावा किया।

बीआरएस नेता ने कहा कि केएलएसआर शुरू से ही रेवंत रेड्डी के लिए एक 'बेनामी' कंपनी के रूप में काम कर रही थी।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी कर कंपनी की दिवालियापन की कार्यवाही जारी रहने के बावजूद उसमें हो रहे बड़े पैमाने के वित्तीय लेनदेन के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के प्रयासों से संबंधित आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

केटीआर ने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी ने कथित टेलीफोन टैपिंग मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की आड़ में दावोस से एक राजनीतिक नाटक रचा, जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाना था।

उन्होंने कंपनी के खिलाफ तत्काल जांच शुरू करने और जांच पूरी होने तक दिवालिया हो चुकी कंपनी के सभी कार्यों को रोकने की मांग की। उन्होंने कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और बिना पात्रता के हासिल किए गए सभी अनुबंधों को रद्द करने की भी मांग की।

केटीआर ने कहा कि प्रवर्तन एजेंसियों ने 2018 में केएलएसआर पर छापे मारे थे और उस समय मीडिया ने कंपनी और रेवंत रेड्डी के बीच संबंधों की खबरें दी थीं, जो उस समय राज्य कांग्रेस अध्यक्ष थे।

हालांकि, बाद में कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की। केटीआर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पदभार संभालने के बाद कंपनी को प्रमुख सरकारी अनुबंध दिलाने में मदद की।

उन्होंने आगे कहा कि 27 सितंबर 2018 को रेवंत रेड्डी के रिश्तेदारों के घरों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी, जिसके दौरान साई मौर्य एस्टेट्स और केएलएसआर के बीच हुए लेन-देन का खुलासा हुआ था।

बीआरएस नेता ने कहा कि जुलाई 2023 में केएलएसआर और एक अन्य कंपनी के बीच विवाद के कारण दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण का रुख किया। इसके बाद, केएलएसआर ने कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान याचिका दायर की, जिसके बाद वित्तीय लेनदेन प्रतिबंधित कर दिए गए।

केटीआर ने दावा किया कि रेवंत रेड्डी कंपनी के लिए अनुकूल फैसले हासिल करने के लिए पर्दे के पीछे काम करने वाले प्रमुख व्यक्ति थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के बहनोई से जुड़ी कंपनी साई मौर्या के साथ फर्म के कथित वित्तीय लेन-देन का हवाला दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी मात्रा में जमीन हासिल करने के लिए केएलएसआर के माध्यम से धन का हस्तांतरण किया गया था और उन्होंने दोहराया कि प्रवर्तन एजेंसियों ने पहले भी अपनी जांच के दौरान सबूत बरामद किए थे।

केटीआर ने आरोप लगाया कि दिवालियापन की स्थिति में होने के बावजूद केएलएसआर ने वर्तमान प्रशासन के तहत लगभग 6,000 करोड़ रुपए की सरकारी परियोजनाएं हासिल कीं, जिनमें अमृत योजना, जल जीवन मिशन, यंग इंडिया आवासीय स्कूल, तेलंगाना सिंचाई परियोजनाएं और सड़क विकास परियोजनाएं शामिल हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी