केटीआर ने 20,000 पुलिस कांस्टेबल पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी करने की मांग की
हैदराबाद, 3 जुलाई (आईएएनएस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने शुक्रवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से 20,000 पुलिस कांस्टेबल पदों को भरने के लिए तत्काल अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया।
रामाराव ने पुलिस कांस्टेबल पद के उम्मीदवारों की ओर से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को एक खुला पत्र लिखा। बीआरएस नेता ने मुख्यमंत्री का ध्यान पुलिस कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर (एसआई) पद के उम्मीदवारों की मांगों और कठिनाइयों की ओर दिलाया।
तेलंगाना के बेरोजगार युवाओं को निराश बताते हुए केटीआर ने कहा कि पुलिस कांस्टेबल और एसआई परीक्षा देने वाले अधिकांश युवा ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। अपने माता-पिता से दूर रहकर, वे हैदराबाद के पीजी और हॉस्टलों में वर्षों से रह रहे हैं और इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन वंचित युवाओं को न्याय दिलाए, न कि उनकी उम्मीदों को तोड़ दे।
तेलंगाना आंदोलन के नारे 'पानी, धन और रोजगार' को याद करते हुए केटीआर ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पदों की संख्या बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे बेरोजगार पुलिस उम्मीदवारों की मांगों को अनसुना करना सरासर अनुचित है।
पत्र में लिखा कि सिर्फ 5,000 पुलिस पदों की अधिसूचना जारी करके मामले से पल्ला झाड़ लेना सही तरीका नहीं है। आरटीआई से पता चला है कि तेलंगाना राज्य में लगभग 17,000 पुलिस पद रिक्त हैं। आपने स्वयं बार-बार 12,000 रिक्त पदों को भरने का वादा किया था। इस पृष्ठभूमि में, केवल 5,000 पदों को भरने की घोषणा ने लगभग 15 लाख पुलिस नौकरी के उम्मीदवारों को निराशा में डाल दिया है। ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि दिलसुखनगर जैसे इलाकों में बेरोजगार युवा रोजाना सड़कों पर उतर रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने बताया कि बीआरएस के कार्यकाल के दौरान तीन भर्ती अभियानों के माध्यम से लगभग 47,000 पुलिस पद भरे गए थे।
केटीआर ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस पार्टी ने अपने 'युवा घोषणापत्र' के तहत कई वादे किए थे। कांग्रेस ने सत्ता में आने के पहले वर्ष में 200,000 सरकारी नौकरियों का वादा किया था, वार्षिक रोजगार कैलेंडर जारी करने का संकल्प लिया था और 4,000 रुपए का बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसने इन सभी वादों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
--आईएएनएस
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