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कावेरी जल विवाद: 2 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाएगी कर्नाटक सरकार, आगे की रणनीति होगी तय

बेंगलुरु, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल विवाद पर राज्य की आगे की रणनीति तय करने के लिए 2 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने गुरुवार को नई दिल्ली में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बैठक उनके आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में आयोजित होगी।
 

बेंगलुरु, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल विवाद पर राज्य की आगे की रणनीति तय करने के लिए 2 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने गुरुवार को नई दिल्ली में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बैठक उनके आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में आयोजित होगी।

डी. के. शिवकुमार ने बताया कि बैठक में राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्री, कावेरी बेसिन क्षेत्र के सांसद, सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और विधानसभा में विभिन्न दलों के फ्लोर लीडरों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक में कावेरी जल विवाद पर राज्य की भावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

उन्होंने बताया कि फिलहाल कर्नाटक सरकार संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रख रही है और वरिष्ठ अधिकारी राज्य की ओर से दलीलें पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

शिवकुमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, वी. सोमन्ना, पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, जगदीश शेट्टार समेत सभी सांसद और केंद्रीय मंत्री राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर शिवकुमार ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि देश का कानून सर्वोपरि है और दोनों राज्यों के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने भाजपा नेता बी. वाई. विजयेंद्र और उनके पिता तथा पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा पर तंज कसते हुए कहा कि लंबे समय तक बिना पूर्ण मंत्रिमंडल के शासन करने का अवसर केवल उन्हें ही मिला था।

गौरतलब है कि कावेरी जल विनियमन समिति ने हाल ही में कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया है। इसके बाद राज्य में विवाद तेज हो गया है और कई स्थानों पर किसान संगठनों तथा कन्नड़ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि सरकार को राज्य के पेयजल हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने चाहिए।

--आईएएनएस

डीएससी