खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन हाईवे से बिहार के केला और मखाना उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) द्वारा हाल ही में स्वीकृत खगड़िया-पूर्णिया खंड (एनएच-31 और एनएच-231) को चार लेन में अपग्रेड करने की परियोजना बिहार के कृषि प्रधान क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली साबित हो सकती है। यह जानकारी सरकार द्वारा रविवार को जारी एक फैक्टशीट में दी गई।
फैक्टशीट में बताया गया कि बिहार के उपजाऊ मैदानों में सुबह होने से पहले ही खगड़िया के खेतों से केले से लदे ट्रक रवाना हो जाते हैं, जबकि देश के सबसे बड़े मखाना उत्पादक केंद्रों में से एक पूर्णिया के तालाबों और प्रोसेसिंग इकाइयों से मखाना बाजारों की ओर भेजा जाता है।
अब तक ट्रैफिक जाम और बारिश के मौसम में सड़क संपर्क बाधित होने के कारण इन उच्च मूल्य वाली कृषि उपज की ढुलाई अकसर प्रभावित होती रही है। खासकर जल्दी खराब होने वाले केले के लिए हर घंटा महत्वपूर्ण होता है। बेहतर और तेज सड़क संपर्क से फलों के खराब होने की संभावना कम होगी, उनकी गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने में मदद मिलेगी।
करीब 3,936.05 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों के जीवन से जुड़ी है जिनकी आजीविका केला और मखाना जैसे कृषि उत्पादों की समय पर बाजार तक पहुंच पर निर्भर करती है। इससे बिहार के कृषि क्षेत्र की आर्थिक नींव और मजबूत होने की उम्मीद है।
पूर्वी बिहार का सड़क नेटवर्क लंबे समय से कोसी और गंगा नदी तंत्र के कारण आने वाली बाढ़ से प्रभावित होता रहा है। हर साल बाढ़ के दौरान सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों और माल की आवाजाही धीमी पड़ जाती है।
चार लेन परियोजना में सड़क की संरचना को मजबूत बनाने, बेहतर रोड ज्योमेट्री और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम जैसी इंजीनियरिंग व्यवस्थाएं शामिल की जाएंगी, जिससे सड़क सालभर सुचारु रूप से संचालित रह सके।
सीमित सड़क संपर्क के कारण सीमांचल क्षेत्र के खगड़िया, कटिहार और आसपास के जिलों को लंबे समय से विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक, शैक्षणिक और आर्थिक केंद्रों तक पहुंचने में यहां के लोगों को राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक समय लगता है।
नई चार लेन सड़क बनने के बाद प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी। अभी जहां सफर पूरा करने में 3.5 से 4 घंटे लगते हैं, वहीं परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी 1.5 से 2 घंटे में तय की जा सकेगी।
यह कॉरिडोर केवल बिहार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत की अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। चार लेन सड़क बनने से बिहार का संपर्क पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए झारखंड से और मजबूत होगा।
यह परियोजना खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों में मौजूद दो लेन सड़क की कमियों, तीखे मोड़ों और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं को दूर करेगी।
साथ ही यह कॉरिडोर पीएम गतिशक्ति के तहत पांच आर्थिक नोड्स (एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क और दो मत्स्य एवं सीफूड पार्क) को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा।
इसके अलावा 11 प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स, जिनमें चार बड़े रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा, चार राष्ट्रीय राजमार्ग और दो राज्य राजमार्ग शामिल हैं, इस परियोजना से बेहतर ढंग से जुड़ेंगे। इससे क्षेत्र में मल्टीमॉडल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
एबीएस
