केरल में तेज हुआ एलपी रैंक होल्डर्स का विरोध-प्रदर्शन; भाजपा और फिल्मी हस्तियों ने आंदोलन का किया समर्थन
तिरुवनंतपुरम, 3 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा की ओर से राज्य सरकार सोमवार को पर कड़े हमले के साथ ही सचिवालय के बाहर केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के लोअर प्राइमरी (एलपी) स्कूल शिक्षक रैंक होल्डर्स के अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया।
मलयालम फिल्म और टेलीविजन जगत के कुछ लोगों ने पहले ही प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों को अपना समर्थन दिया है। भाजपा के बड़े नेता रोजाना आकर उन्हें अपना समर्थन दे रहे हैं।
भाजपा की ओर से मोर्चा संभालते हुए प्रदेश अध्यक्ष और विधायक राजीव चंद्रशेखर ने गोपिका का मामला उठाया, जिन्होंने एलपी स्कूल टीचर परीक्षा में नौवीं रैंक हासिल की थी।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मेरिट के आधार पर टॉप रैंक हासिल करने के बावजूद उन्हें क्लासरूम में पढ़ाने के बजाय सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
गोपिका की हालत को केरल के सैकड़ों योग्य युवाओं के संघर्ष का प्रतीक बताते हुए चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों को नौकरी नहीं दी जा रही है जबकि राजनीतिक कनेक्शन वाले लोगों को 'बैकडोर' से भर्ती किया जा रहा है।
उन्होंने विपक्ष की सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली एलडीएफ और सत्ताधारी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ दोनों पर राज्य के युवाओं के लिए मेरिट और रोजगार के मौकों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
"रंडाला, ओन्नानु (दो नहीं, एक)" नारे का इस्तेमाल करते हुए, चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों को नौकरी देने से इनकार करने के मामले में दोनों गठबंधन एक जैसे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गोपिका और नियुक्ति के लिए प्रदर्शन कर रहे हर रैंक होल्डर के साथ मजबूती से खड़ा है।
प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए मलयालम फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री की कई हस्तियों के सामने आने से आंदोलन को भी हौसला मिला।
इन हस्तियों ने सरकार से आग्रह किया कि वह बिना और देरी किए रैंक होल्डर्स की चिंताओं का समाधान करे।
प्रदर्शनकारी 31 मई, 2025 को केरल पीएससी द्वारा जारी एलपी स्कूल टीचर रैंक लिस्ट के आधार पर तुरंत नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने खाली पदों की जानकारी पारदर्शी तरीके से देने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि उपलब्ध पदों की पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे वैलिड रैंक लिस्ट होने के बावजूद नियुक्तियों में देरी हो रही है।
राजनीतिक समर्थन बढ़ने और जनता का साथ मिलने के साथ ही, यह विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक और चुनौती बन गया है। सरकार को भर्ती में देरी और नियुक्ति का इंतजार कर रहे सैकड़ों भावी शिक्षकों के भविष्य को लेकर लगातार सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
--आईएएनएस
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