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केरल: आईएमए ने जूनियर डॉक्टरों के लिए कम से कम 80,000 रुपए मासिक वेतन की मांग की

कोच्चि, 27 जून (आईएएनएस)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की केरल राज्य शाखा ने केरल सरकार से जूनियर डॉक्टरों के वेतन ढांचे में तुरंत बदलाव करने की मांग की है। एसोसिएशन ने युवा मेडिकल प्रोफेशनल्स को मिलने वाले मौजूदा वेतन को बहुत कम बताया है और चेतावनी दी है कि कम वेतन के कारण राज्य से डॉक्टरों के बाहर जाने का सिलसिला बढ़ सकता है।
 

कोच्चि, 27 जून (आईएएनएस)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की केरल राज्य शाखा ने केरल सरकार से जूनियर डॉक्टरों के वेतन ढांचे में तुरंत बदलाव करने की मांग की है। एसोसिएशन ने युवा मेडिकल प्रोफेशनल्स को मिलने वाले मौजूदा वेतन को बहुत कम बताया है और चेतावनी दी है कि कम वेतन के कारण राज्य से डॉक्टरों के बाहर जाने का सिलसिला बढ़ सकता है।

यह मांग त्रिशूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज द्वारा कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) के पद के लिए हाल ही में जारी किए गए नोटिफिकेशन के बाद उठी है, जिसमें एमबीबीएस क्वालिफाइड डॉक्टरों को सिर्फ 42,000 रुपए की मासिक सैलरी की पेशकश की गई थी।

आईएमए ने मांग की है कि जूनियर डॉक्टरों के लिए कम से कम मासिक वेतन बढ़ाकर 80,000 रुपए किया जाए।

मौजूदा वेतन ढांचे को डॉक्टरों की जिम्मेदारियों के हिसाब से अपर्याप्त बताते हुए एसोसिएशन ने कहा कि युवा मेडिकल प्रोफेशनल देश के सबसे चुनौतीपूर्ण पेशों में से एक में आने से पहले 5.5 साल से ज्यादा की कड़ी मेडिकल शिक्षा और अनिवार्य ट्रेनिंग से गुजरते हैं।

एसोसिएशन ने कहा कि इमरजेंसी विभागों में जान बचाने वाले फैसले लेने और अहम मेडिकल-लीगल जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें कई ऐसे सरकारी कर्मचारियों से बहुत कम वेतन मिलता है जिनकी प्रोफेशनल योग्यता उनसे काफी कम होती है।

आईएमए ने केरल की एक यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी ऑफिसर के पद का उदाहरण दिया, जिसके लिए सिर्फ बीएससी की योग्यता चाहिए, लेकिन शुरुआती वेतन 55,200 रुपए से 1.15 लाख रुपए प्रति माह तक होता है।

इस तुलना का मकसद दूसरे सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर सवाल उठाना नहीं था, बल्कि इंसानी जान बचाने की जिम्मेदारी संभालने वाले डॉक्टरों को मिलने वाले वेतन में अंतर को उजागर करना था।

जूनियर डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों की रीढ़ बताते हुए एसोसिएशन ने कहा कि वे कैजुअल्टी विभागों, इंटेंसिव केयर यूनिट्स, मेडिकल और सर्जिकल वार्डों और लेबर रूम में मरीजों की देखभाल का ज्यादातर काम संभालते हैं और अक्सर भारी शारीरिक और मानसिक दबाव में लंबी शिफ्ट में काम करते हैं।

आईएमए ने चेतावनी दी कि केरल में पहले से ही बेहतर वेतन और काम की स्थितियों की तलाश में प्रतिभाशाली युवा डॉक्टर दूसरे राज्यों और विदेशों में जा रहे हैं।

जब तक सरकार एंट्री लेवल पर अच्छा वेतन नहीं देती, तब तक राज्य के लिए कुशल मेडिकल प्रोफेशनल्स को बनाए रखना मुश्किल होगा, जिसका असर आखिरकार पब्लिक हेल्थकेयर की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

सरकार से कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर्स और दूसरे जूनियर डॉक्टरों के लिए तय वेतन की तुरंत समीक्षा करने का आग्रह करते हुए आईएमए केरल राज्य के अध्यक्ष एमएन मेनन और राज्य सचिव रॉय आर. चंद्रन ने कहा कि उचित वेतन सुनिश्चित करना न केवल प्रोफेशनल सम्मान का मामला है, बल्कि केरल के हेल्थकेयर सिस्टम की सुरक्षा और अपने सबसे अच्छे मेडिकल टैलेंट को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी