केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटे के कार हादसे में मौत के मामले में आरोपी जज की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
कोच्चि, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने चेरानेल्लूर सड़क हादसे के मामले में आरोपी बनाए गए एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की गिरफ्तारी पर गुरुवार को रोक लगा दी। इस हादसे में न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से स्कूटर सवार की मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने न्यायाधीश की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया। न्यायाधीश त्रिशूर जिले के इरिंजालाकुडा स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में तैनात हैं। अदालत ने पुलिस को अगले आदेश तक न्यायाधीश को गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उनसे पूछताछ सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार की जाए।
न्यायाधीश की हिरासत में पूछताछ की जरूरत पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने जांच टीम से पूछा कि जब वह जांच में सहयोग कर रहे हैं, तो उन्हें गिरफ्तार करने की आवश्यकता क्यों है। अदालत ने टिप्पणी की, “उन्हें चार घंटे तक पूछताछ करने की क्या जरूरत थी और अब आगे पूछताछ क्यों की जा रही है? उनकी गिरफ्तारी क्यों जरूरी है? वह एक न्यायिक अधिकारी हैं और जांच में सहयोग करेंगे।”
न्यायाधीश की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विजया भानु ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल बुधवार को पुलिस के समक्ष पेश हुए थे और उनसे चार घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। हालांकि, पीड़ित के कानूनी वारिसों की ओर से पेश वकील ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद न्यायाधीश ने सबूतों से छेड़छाड़ की थी।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते समय उसे कानून के प्रावधानों के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से भी जवाब मांगा है।
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर को तड़के करीब 2.20 बजे कोच्चि के पास चेरानेल्लूर में कंटेनर रोड पर हुई थी। आरोप है कि किशोर द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार ने स्कूटर को टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटर सवार 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई। अपनी याचिका में न्यायाधीश ने दावा किया कि घटना के समय वह घर पर सो रहे थे और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी कार बाहर ले जाई गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी तब मिली, जब उन्हें फोन कर बताया गया कि उनका नाबालिग बेटा उनकी जानकारी के बिना गाड़ी लेकर निकला था और दुर्घटना का शिकार हो गया।
इस मामले में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 लगाई गई है, जो गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है। इसके अलावा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए समेत अन्य प्रावधान भी लगाए गए हैं। धारा 199ए किशोरों द्वारा किए गए अपराधों और ऐसे मामलों में अभिभावकों या वाहन मालिकों की जवाबदेही से संबंधित है। किशोर न्याय बोर्ड ने 26 अक्टूबर को आरोपी किशोर को जमानत दे दी थी। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से उसकी जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका सत्र न्यायालय में लंबित है।
--आईएएनएस
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