केरल हाई कोर्ट ने पीएससी जांच पर उठाए सवाल, पूछा- मुख्य व्यक्ति से पूछताछ किए बिना जांच कैसे?
कोच्चि, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने शनिवार को राज्य योजना बोर्ड के एक वरिष्ठ पद की भर्ती के लिए आयोजित केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की प्रगति पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि चयन प्रक्रिया से जुड़े मुख्य व्यक्ति से पूछताछ किए बिना जांच कैसे आगे बढ़ सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अगर पीएससी और सरकार 'भाई-भाई' की तरह काम करेंगे तो लोगों को पूरी प्रक्रिया पर संदेह करने का कारण मिलेगा।
यह टिप्पणी उस समय की गई जब अदालत पीएससी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने भर्ती में कथित अनियमितताओं की क्राइम ब्रांच जांच को रद्द करने की मांग की है।
सरकार ने अदालत को बताया कि जांच जारी है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि पीएससी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।
वहीं, पीएससी का कहना है कि कथित अनियमितताएं केवल एक लिपिकीय (क्लेरिकल) गलती का परिणाम थीं और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोई जानबूझकर कोशिश नहीं की गई थी।
पीएससी ने जांच को समाप्त करने की मांग करते हुए दलील दी कि लागू नियमों के तहत इस तरह की जांच की अनुमति नहीं है।
इसके जवाब में सरकार ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो जांच को रोकता हो।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को तय की है।
यह मामला राज्य योजना बोर्ड के उद्योग और बुनियादी ढांचा प्रभाग (इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन) के प्रमुख पद की भर्ती से जुड़ा है।
पीएससी ने जुलाई 2023 में परीक्षा आयोजित की थी। बाद में एक उम्मीदवार ने पाया कि उत्तर पुस्तिकाओं में कई प्रश्नों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था, जिसके बाद चयन प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई।
क्राइम ब्रांच का आरोप है कि कुल 58 अंकों के 10 प्रश्नों का मूल्यांकन नहीं किया गया था।
इस चूक का असर परीक्षा में शामिल कई उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं पर पड़ा।
मूल चयन सूची में अरुण जे. प्रताप पहले स्थान पर थे और उन्होंने योजना बोर्ड में पदभार भी संभाल लिया था। वहीं, तीसरे स्थान पर रहे श्याम कृष्णन ने मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती दी।
पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार के बाद श्याम कृष्णन पहले स्थान पर पहुंच गए, जबकि अरुण जे. प्रताप पांचवें स्थान पर खिसक गए।
पीएससी अब भी यह दावा कर रहा है कि यह गलती तकनीकी थी और अनजाने में हुई थी।
दूसरी ओर, क्राइम ब्रांच यह जांच कर रही है कि यह केवल एक गलती थी या फिर इसके पीछे कोई जानबूझकर की गई गड़बड़ी थी।
इस मामले ने पीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीएससी सार्वजनिक पदों पर निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
हाई कोर्ट की ताजा टिप्पणियों के बाद जांच को लेकर पीएससी के रवैये पर भी निगरानी और बढ़ गई है।
--आईएएनएस
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