केरल: छोटे मछुआरों ने खराब मौसम के दौरान आय नुकसान पर मुआवजे और सामाजिक सुरक्षा की मांग की
कोच्चि, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल में छोटे स्तर पर मछली पकड़ने वाले मछुआरों ने खराब मौसम से बेहतर सुरक्षा और मजबूत सामाजिक सुरक्षा की मांग की है। केरल के एर्नाकुलम में आयोजित सामुदायिक परामर्श बैठक में मछुआरा समुदायों ने मांग की कि खराब मौसम और उग्र समुद्री परिस्थितियों के कारण जब वे मछली पकड़ने नहीं जा पाते हैं, तो उन्हें आय के नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
यह बैठक भारत की लघु स्तर की मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (एनपीओए-एसएसएफ) तैयार करने के लिए देशव्यापी अभ्यास का हिस्सा थी।
परामर्श में मछुआरा समुदायों के प्रतिनिधियों, महिला मत्स्य कर्मियों, मछली विक्रेताओं, मछुआरा संगठनों और शोधकर्ताओं सहित 50 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम और गंभीर मौसम संबंधी घटनाएं मछुआरों की आजीविका के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं। उन्होंने मांग की कि कार्ययोजना में आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन उपायों को शामिल किया जाए। उन्होंने अत्यधिक खराब मौसम के कारण मछली पकड़ने के छूटे दिनों के लिए मुआवजे की व्यवस्था करने की भी मांग की।
बैठक में सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए जाल (मेश) के आकार संबंधी व्यापक नियम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। प्रतिभागियों ने मछली पकड़ने के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करने और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की।
महिला मत्स्य कर्मियों ने मछली प्रसंस्करण, विपणन और फसलोपरांत गतिविधियों में अपनी भूमिका को लेकर चिंताएं जताईं। उन्होंने महिलाओं को औपचारिक रूप से मत्स्य कर्मी का दर्जा देने और मत्स्य नीति निर्माण तथा निर्णय प्रक्रिया में उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
महिला मछली श्रमिकों ने मछली की प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और मछली पकड़ने के बाद की अन्य गतिविधियों में अपनी भूमिका को लेकर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि महिलाओं को मछली श्रमिकों के तौर पर औपचारिक मान्यता दी जाए और मछली पालन से जुड़ी पॉलिसी और फैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले।
सीआईएफटी के डायरेक्टर डॉ. जॉर्ज निनन ने 'फेडरेशन ऑफ इंडियन फिशर ऑर्गेनाइजेशन्स' (एफआईफओ) के साथ मिलकर आयोजित इस मीटिंग का उद्घाटन किया।
केंद्र सरकार ने इस योजना को तैयार करने के लिए मछली पकड़ने वाले समुदायों के साथ देशव्यापी बातचीत शुरू कर दी है। केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस बातचीत की प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहा है, और 'बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन' (बीओबीपी-आईजीओ) इसमें मदद और तालमेल बिठाने का काम कर रहा है।
उम्मीद है कि नेशनल टास्क फोर्स नवंबर की शुरुआत में इन सुझावों और जानकारियों को एक ड्राफ्ट प्लान में शामिल कर लेगी। इस ड्राफ्ट को 21 नवंबर को जनता की राय जानने के लिए जारी किया जाएगा और अंतिम रूप देने व नोटिफिकेशन जारी करने से पहले इसकी और समीक्षा की जाएगी।
सीआईएफटी के एक्सटेंशन, इन्फॉर्मेशन और स्टैटिस्टिक्स डिवीजन की प्रमुख डॉ. निकिता गोपाल ने इस बातचीत का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, "छोटे पैमाने पर मछली पकड़ने के काम के लिए भारत की 'नेशनल प्लान ऑफ एक्शन' तैयार करने के मकसद से इन सुझावों को नेशनल टास्क फोर्स के सामने पेश किया जाएगा।"
बे-ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (बीओबीपी-आईजीओ) के डायरेक्टर डॉ. पी. कृष्णन ने कहा कि प्रस्तावित योजना में मछली पकड़ने के संसाधनों तक पहुंच, टिकाऊ मछली पकड़ने, अच्छे काम, लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन और आपदा के जोखिमों जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।
--आईएएनएस
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