केरल भाजपा ने केआईआईएफबी सौदों की जांच की मांग की
तिरुवनंतपुरम, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता कुम्मनम राजशेखरन ने शुक्रवार को केरल अवसंरचना निवेश निधि बोर्ड (केआईआईएफबी) के भूमि अधिग्रहण और वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं की तत्काल और व्यापक जांच की मांग की है।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, पूर्व वित्त मंत्री केएन बालागोपाल और केआईआईएफबी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) केएम अब्राहम की भूमिका की जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने गुरुवार को मीडिया को बताया था कि केआईआईएफबी के कामकाज पर गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट गंभीर है।
उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल जांच की प्रकृति तय करेगा और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
कुम्मनम ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, ऋण लेने, परामर्श नियुक्तियों, विज्ञापन व्यय और वित्तीय नियंत्रणों से संबंधित आरोपों के लिए विस्तृत और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार को अभिलेखों की जांच किए बिना आरोपों को खारिज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कन्नूर में अकेले 1,000 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण के आरोपों की विस्तृत जांच की मांग की।
जांच में यह स्थापित होना चाहिए कि क्या अधिग्रहण आवश्यक थे, भूमि की कीमतें कैसे निर्धारित की गईं और क्या किसी व्यक्ति या निजी हित को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ।
राज्य सरकार को तिरुवनंतपुरम और एर्नाकुलम जैसे जिलों की विकास आवश्यकताओं की तुलना में कन्नूर में भूमि अधिग्रहण के पैमाने को भी स्पष्ट करना चाहिए।
कुम्मनम ने केआईआईएफबी के ऋणों, सरकारी गारंटियों और वित्तीय देनदारियों की भी जांच की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था ने वित्तीय नियंत्रणों को दरकिनार किया है और सवाल उठाया कि क्या उसके निर्णय कानून और सरकार के कार्य नियमों के अनुरूप थे।
उन्होंने केआईआईएफबी परियोजनाओं पर 13,103 करोड़ रुपए के अतिरिक्त व्यय, मसाला बांड लेनदेन के माध्यम से 181.73 करोड़ रुपए के नुकसान और विज्ञापन एवं प्रचार गतिविधियों पर 203.72 करोड़ रुपए के खर्च के आरोपों का हवाला दिया।
उन्होंने आधिकारिक अभिलेखों के माध्यम से इन आंकड़ों के स्वतंत्र सत्यापन की मांग की।
भाजपा नेता ने कहा कि पूर्व केआईआईएफबी सीईओ की प्रशासनिक शक्तियों, कथित दोहरे पदों, परामर्श अनुबंधों और नियुक्तियों की भी जांच की जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि आवश्यक स्वीकृतियों और भर्ती मानदंडों का पालन किया गया था या नहीं।
कुम्मनम ने मांग की कि राज्य सरकार संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखे और उनकी गहन जांच करे तथा धन के प्रवाह का पता लगाए।
यदि प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार या आपराधिक गतिविधि के सबूत मिलते हैं, तो राज्य सरकार को सतर्कता विभाग या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पर विचार करना चाहिए।
अब केरल मंत्रिमंडल का जांच की प्रकृति और दायरे पर निर्णय महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया से यह निर्धारित होगा कि केआईआईएफबी के खिलाफ आरोपों की जांच कैसे की जाएगी और आगे की कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
--आईएएनएस
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