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पंजाब भाजपा ने केजरीवाल और मान सरकार को घेरा, तीर्थयात्रा योजना की बसों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

चंडीगढ़, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल राज्य के बुजुर्ग निवासियों की सुरक्षा से ज्यादा दूसरे राज्यों से आए बस माफिया को लेकर चिंतित हैं।
 

चंडीगढ़, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल राज्य के बुजुर्ग निवासियों की सुरक्षा से ज्यादा दूसरे राज्यों से आए बस माफिया को लेकर चिंतित हैं।

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा, "इसीलिए वे (अरविंद केजरीवाल) मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत चलने वाली बसों से संबंधित सुरक्षा मुद्दों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के नोटिस को राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं।"

ढिल्लों ने कहा कि मानवाधिकार आयोग ने पिछले एक साल में स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं के कारण देशभर में 1,000 बसों के खिलाफ कार्रवाई की है।

उन्‍होंने कहा, “इस तरह की घटनाएं बार-बार घट रही हैं, जिनमें लोगों की जान जा रही है। इस घटना को केवल पंजाब से जोड़ना सरासर झूठ है। जनवरी में पंजाब सरकार ने मानवाधिकार आयोग को सूचित किया था कि पंजाब में कोई स्लीपर बस पंजीकृत नहीं है।”

ढिल्लों ने आरोप लगाया, "इसका मतलब यह है कि पंजाब में तीर्थयात्रा योजना के तहत चलने वाली सभी बसें अन्य राज्यों से मंगाई गई निजी बसें हैं। न केवल बसें पंजाब के बाहर से मंगाई गई हैं, बल्कि योजना चलाने वाले लोग भी दिल्ली से लाए गए हैं। केजरीवाल अपने करीबी सहयोगी के माध्यम से पंजाब की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना को बस माफिया की तरह चला रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि झूठे बयान देना केजरीवाल की आदत है। पंजाब में तीर्थयात्रा योजना को बंद करने की कोशिश का आरोप लगाने से पहले, केजरीवाल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के बाद योजना बंद कर दी गई थी।

ढिल्लों ने कहा, "केजरीवाल को पहले इस सवाल का जवाब देना होगा।"

इसी बीच भाजपा नेता श्वेत मलिक ने खस्ताहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा। मलिक ने कहा कि राज्य के सरकारी अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना चल रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 2,098 स्वीकृत पदों में से लगभग 1,000 पद खाली हैं। मलिक ने कहा कि यह संकट इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि पंजाब सरकार ने 2022 से अब तक विशेषज्ञों की एक भी नियमित भर्ती नहीं की है।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी