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नॉर्वे में संसद के बाहर कश्मीरी प्रवासियों का प्रदर्शन, पाक सेना की ज्यादतियों के खिलाफ उठाई आवाज

ओस्लो, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में की जा रही ज्यादती के खिलाफ नार्वे में कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन किया। नॉर्वेजियन संसद के बाहर उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बरता और हिंसा का मुद्दा उठाया।
 

ओस्लो, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में की जा रही ज्यादती के खिलाफ नार्वे में कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन किया। नॉर्वेजियन संसद के बाहर उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बरता और हिंसा का मुद्दा उठाया।

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए, नागरिक समाज समूह 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) के साथ एकजुटता दिखाई और इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के ऑपरेशन को खत्म करने की मांग की।

बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए जेएएसी ने लिखा, "सेना द्वारा कश्मीरियों के नरसंहार के खिलाफ नॉर्वेजियन संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी मांग करते हैं कि हत्यारी और आतंकवादी सेना को हटाकर जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के साथ 4 अक्टूबर, 2025 को हुए समझौते को तुरंत लागू किया जाए। अगर शासक फासीवाद जारी रखते हैं, तो हम विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।"

4 अक्टूबर, 2025 का समझौता मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान की संघीय सरकार, पीओके प्रशासन और जेएएसी के प्रतिनिधियों के बीच हुआ था। यह समझौता सितंबर के आखिर और अक्टूबर 2025 की शुरुआत में हुए अशांति और पूरे इलाके में शटडाउन के बाद हुआ था, जिसमें पीओके में कई लोगों की मौत हो गई थी।

नॉर्वे में यह विरोध प्रदर्शन दुनिया भर में कश्मीरी समूहों द्वारा किए जा रहे बढ़ते प्रदर्शनों के बीच हो रहा है। वे पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा की जा रही बर्बर कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग कर रहे हैं।

इस हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिका में रहने वाले कई कश्मीरियों ने न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर प्रदर्शन किया और पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता को खत्म करने की मांग की।

उनके हाथों में जो प्लेकार्ड थे, उन पर लिखा था, "हर जान जो गई, उसके लिए हमें न्याय चाहिए," "कश्मीरियों की हत्या बंद करो," और "हमारा अधिकार, हमारी आवाज, हमारा भविष्य।"

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बर कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। इलाके में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और पूरी तरह से कम्युनिकेशन ब्लैकआउट (संचार सेवाएं बंद) लागू है।

पिछले हफ्ते, 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर पीओके में बिगड़ते हालात पर दखल देने की अपील की। ​​साथ ही, उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे खून-खराबे को रोकने और नागरिकों की जान बचाने के उपाय करने की मांग की।

यूएन महासचिव को लिखे पत्र में ब्रिटिश सांसदों ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में मौत और घायलों की तादाद की खबरें, बातचीत पर रोक, मनमानी गिरफ्तारियां, जरूरी सामान की सप्लाई में रुकावट और शांतिपूर्ण नागरिक व राजनीतिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों ने काफी चिंता पैदा की है। हमें ब्रिटिश कश्मीरियों से भी लगातार खबरें मिल रही हैं जो इस इलाके में अपने रिश्तेदारों और करीबियों की सुरक्षा और भलाई को लेकर बहुत परेशान हैं।"

सांसदों ने यूएन से अपील की कि वह अपनी संबंधित संस्थाओं और माध्यमों से खून-खराबा रोके। वहां रह रहे लोगों की दूर दराज के इलाकों में रह रहे संबंधियों से संपर्क स्थापित कराने में मदद करें और दवाइयों-भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रबंध कराने के प्रयासों में सहयोग दें।

--आईएएनएस

केआर/