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बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने जनसभा में सीएम शिवकुमार के लिए खाली कुर्सी रखी, खुले मंच पर बहस की दी चुनौती

बेंगलुरु, 27 जून (आईएएनएस)। बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को लेकर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच जारी सियासी टकराव शनिवार को और तेज हो गया। कुमारस्वामी ने बिदादी के निकट आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री के लिए मंच पर एक खाली कुर्सी रखकर उन्हें प्रभावित किसानों के बीच खुली बहस के लिए आमंत्रित किया।
 

बेंगलुरु, 27 जून (आईएएनएस)। बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को लेकर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच जारी सियासी टकराव शनिवार को और तेज हो गया। कुमारस्वामी ने बिदादी के निकट आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री के लिए मंच पर एक खाली कुर्सी रखकर उन्हें प्रभावित किसानों के बीच खुली बहस के लिए आमंत्रित किया।

कुमारस्वामी इससे पहले भी मुख्यमंत्री शिवकुमार को इस परियोजना पर प्रभावित क्षेत्र में सार्वजनिक बहस के लिए दो पत्र लिख चुके हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके पांच प्रतिनिधियों को विधान सौधा में चर्चा के लिए आमंत्रित किया था।

हालांकि, शनिवार को बेंगलुरु में पत्रकारों द्वारा इस मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चले गए।

बिदादी के निकट भैरमंगला गांव में आयोजित जनसभा के दौरान मंच पर कुमारस्वामी की सीट के बगल में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नाम की एक खाली कुर्सी रखी गई।

मीडिया से बातचीत में कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री में जनता के बीच खुली बहस करने का नैतिक साहस नहीं है।

उन्होंने कहा, "मैं पूरे साहस के साथ यहां आया हूं। चर्चा जनता के सामने होनी चाहिए। मैं कहीं और क्यों जाऊं? मुख्यमंत्री किसी भी कीमत पर यहां नहीं आएंगे, क्योंकि वे जनता का सामना नहीं कर सकते।"

कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री को सड़क पर लाना नहीं है, बल्कि उन किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों के सामने चर्चा करना है, जिन्होंने वर्षों से जनप्रतिनिधियों पर भरोसा किया है।

उन्होंने कहा, "मैं यहां उन लोगों का सम्मान करने आया हूं, जो पिछले 460 दिनों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। यदि मुख्यमंत्री वास्तव में उनका सम्मान करते हैं तो उन्हें यहां आकर बहस करनी चाहिए। दूर बैठकर मेरे खिलाफ बयान देना उचित नहीं है।"

उन्होंने कहा कि वह वास्तविक किसानों के साथ किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार हैं।

मुख्यमंत्री के लिए खाली कुर्सी रखने को राजनीतिक नाटक बताए जाने के सवाल पर कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें पहले से पता था कि शिवकुमार नहीं आएंगे।

उन्होंने कहा, "अगर उन्हें पता था कि वे यहां नहीं आएंगे, तो फिर उन्होंने मुझे विधान सौधा क्यों बुलाया? चर्चा तो प्रभावित लोगों के बीच ही होनी चाहिए।"

मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि एक ओर शिवकुमार 15 लाख पौधे लगाने के अभियान में शामिल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार टाउनशिप परियोजना के लिए लगभग 10 लाख पेड़ काटने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने कहा, "मैं किसानों के आंदोलन को भड़का नहीं रहा हूं। वे अपनी पैतृक जमीन बचाने के लिए खुद आंदोलन कर रहे हैं।"

कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री से अहंकार छोड़कर किसानों की मांगें सुनने की अपील करते हुए कहा कि बिदादी के किसान और महिलाएं लगभग 480 दिनों से अपनी पैतृक भूमि बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री शिवकुमार के करीबी और कांग्रेस विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक बहस में शामिल नहीं होंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी का उद्देश्य चर्चा नहीं, बल्कि क्षेत्र में अशांति और हिंसा का माहौल पैदा करना है।

बालकृष्ण ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री सार्वजनिक बहस के लिए तैयार भी हो जाते, तो बैठक की व्यवस्था उन्हें करनी चाहिए थी। मुद्दा विधान सौधा में उठे या भैरमंगला में, विषय एक ही है। कुमारस्वामी का मकसद केवल मुख्यमंत्री की छवि खराब करना है।"

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मीडिया में चर्चा हो सकती है और कुमारस्वामी चाहें तो 10 या उससे अधिक लोगों के साथ मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सार्वजनिक बहस में हिस्सा नहीं लेंगे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी किसान परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। कुछ गांवों में पायलट आधार पर अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद लगभग 75 प्रतिशत भूमि मालिक मुआवजा लेकर अपनी जमीन देने के लिए तैयार हो गए थे।

इसी बीच, परियोजना के समर्थन में किसानों के एक समूह ने विरोध कर रहे किसानों का सामना किया और नारेबाजी करते हुए कुमारस्वामी को उनके सामने लाने की मांग की, ताकि वे भी अपना पक्ष रख सकें। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

--आईएएनएस

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