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बांधों में पानी की उपलब्धता देखकर ही तमिलनाडु को देंगे कावेरी का पानी : सीएम शिवकुमार

बेंगलुरु, 11 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि कावेरी जल समिति ने राज्य से अगले 15 दिन तक हर दिन 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने को कहा है। हालांकि राज्य सरकार अपने बांधों में कितना पानी है, यह देखकर ही तमिलनाडु को पानी छोड़ने का फैसला करेगी।
 

बेंगलुरु, 11 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि कावेरी जल समिति ने राज्य से अगले 15 दिन तक हर दिन 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने को कहा है। हालांकि राज्य सरकार अपने बांधों में कितना पानी है, यह देखकर ही तमिलनाडु को पानी छोड़ने का फैसला करेगी।

बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले पर चर्चा के लिए मंत्रियों और विशेषज्ञों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी।

सीएम शिवकुमार ने कहा कि सरकार राज्य के जलाशयों में पानी के बहाव पर बारीकी से नजर रख रही है और यह सुनिश्चित करेगी कि कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा हो।

उन्होंने कहा, "तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश आया है। मैं लगातार हमारे जलाशयों में पानी के बहाव पर नजर रख रहा हूं। हम बांधों में पानी की उपलब्धता के आधार पर फैसला लेंगे। पानी छोड़ने के आदेश को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे धैर्य रखें और शांति बनाए रखें।"

उन्होंने कहा कि सरकार कोर्ट के आदेशों का सम्मान करेगी और साथ ही कर्नाटक के किसानों की फसलों की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश करेगी।

उन्होंने कहा, "हमें आपकी सेवा करने का अधिकार मिला है। हम नहीं चाहते कि किसी भी स्थिति में किसानों को नुकसान हो। प्रकृति हमारी रक्षा करेगी और हम अपने राज्य के किसानों की रक्षा करेंगे।"

सीएम शिवकुमार ने कहा कि सरकार कावेरी मुद्दे को पारदर्शी तरीके से निपटाएगी और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनने देगी।

उन्होंने कहा, "मैं सिंचाई से जुड़े मुद्दों पर पूरी पारदर्शिता के साथ काम करूंगा। इस मामले में कोई राजनीति नहीं हो सकती। कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए, हमारी पहली प्राथमिकता अपने किसानों के फसलों की रक्षा करना है।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ मंत्री और पार्टी नेता मंगलवार रात इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे जबकि कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई तय करने के लिए बुधवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है।

इस बीच, जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि 15 दिनों तक हर दिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का मतलब है कि 15 टीएमसी से ज्यादा पानी छोड़ा जाएगा।

रेड्डी ने कहा, "सीडब्ल्यूआरसी ने हमसे अगले 15 दिनों तक हर दिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा है। इसका मतलब है कि 15 टीएमसी से ज्यादा पानी छोड़ना होगा। हमारे एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, सिंचाई विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक टीम, जो पिछले 20 सालों से कावेरी मामले में बहस कर रही है, दिल्ली में है।"

उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने मई, जून और जुलाई के दौरान तमिलनाडु के लिए पहले ही काफी मात्रा में पानी छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, "मई, जून और जुलाई के दौरान लगभग 3.5 टीएमसी पानी बह गया। चूंकि काबिनी जलाशय भरा हुआ था और अतिरिक्त पानी जमा करने की कोई गुंजाइश नहीं थी, इसलिए लगभग 7.5 टीएमसी पानी तमिलनाडु की ओर बह गया।"

रेड्डी ने कर्नाटक में कमजोर पड़ रहे दक्षिण-पश्चिम मानसून पर भी चिंता जताई और कहा कि राज्य पूरी तरह से अगस्त की बारिश पर निर्भर नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा, "हमारा दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ रहा है और हम अगस्त की बारिश पर निर्भर नहीं रह सकते। हालांकि, तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मॉनसून की बारिश होने की संभावना है।"

मंत्री ने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री के साथ सलाह-मशविरा करके कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की बैठक और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के नतीजों पर विचार करने के बाद अपना अगला फैसला लेगी।

हालांकि, सूत्रों ने पुष्टि की है कि पीने के पानी की उपलब्धता और किसानों की जरूरतों को लेकर चिंताओं के बीच राज्य सरकार ने सीडब्ल्यूआरसी की सिफारिश को चुनौती देने का फैसला किया है। सीडब्ल्यूआरसी ने सिफारिश की है कि कर्नाटक 15 दिनों तक तमिलनाडु को रोजाना 12,000 क्यूसेक कावेरी का पानी छोड़े।

उम्मीद है कि कर्नाटक यह तर्क देगा कि आने वाले दिनों में राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी बारिश होने की संभावना कम है जबकि तमिलनाडु में साल के आखिर में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश होने की संभावना है। राज्य सरकार का कहना है कि रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने से कर्नाटक में खेती के लिए पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

इस ताजा घटनाक्रम से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद और तेज होने की संभावना है क्योंकि कर्नाटक का जोर इस बात पर है कि कावेरी का और पानी छोड़ने से पहले उसकी पीने के पानी और खेती की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम