Aapka Rajasthan

कर्नाटक डिप्टी सीएम ने सूखे के बिगड़ते हालात पर पीएम मोदी को लिखा पत्र, मांगी तत्काल मदद

बेंगलुरु, 16 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में कमजोर मानसून के कारण सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इस बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के नियमों में राहत देने और राज्य को अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
 

बेंगलुरु, 16 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में कमजोर मानसून के कारण सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इस बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के नियमों में राहत देने और राज्य को अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

पत्र में परमेश्वर ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कर्नाटक में लगातार सामान्य से कम बारिश हुई है। इसका सीधा असर खेती, पेयजल व्यवस्था, भूजल स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। जून महीने में कर्नाटक में 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 36 प्रतिशत वर्षा की कमी रही। जुलाई में भी स्थिति नहीं सुधरी और राज्य में अब तक 34 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं बेंगलुरु में भी सामान्य से करीब 34 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार, कम बारिश और अधिक तापमान के कारण प्रभावित इलाकों में करीब 80 प्रतिशत बोई गई फसल बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने इसके लिए मुख्य रूप से एल नीनो के प्रभाव को जिम्मेदार बताया। साथ ही कहा कि कई जिलों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे सिंचाई और पेयजल संकट और गहरा गया है।

पत्र में बताया गया है कि विजयनगर (61 प्रतिशत), मैसूर (55 प्रतिशत), मडिकेरी (51 प्रतिशत), चिक्कमगलुरु (48 प्रतिशत), दावणगेरे (47 प्रतिशत), हावेरी (46 प्रतिशत, शिवमोग्गा (44 प्रतिशत), कलबुर्गी (43 प्रतिशत), मंगलुरु (43 प्रतिशत) और बीदर (40 प्रतिशत) जैसे जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है।

परमेश्वर ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कर्नाटक द्वारा सूखे का आधिकारिक ज्ञापन भेजने से पहले मौजूदा सूखा आकलन के नियमों की समीक्षा की जाए।

उन्होंने मांग की कि एफआरयूआईटीएस (किसान पंजीकरण और एकीकृत लाभार्थी सूचना प्रणाली) डेटाबेस को छोटे और सीमांत किसानों की पहचान के लिए स्वीकार किया जाए। वर्तमान में 2015-16 की कृषि जनगणना के आधार पर सहायता तय की जाती है, जो अब राज्य की वास्तविक कृषि स्थिति को नहीं दर्शाती।

उन्होंने सूखा मैनुअल-2020 के प्रावधानों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के मानकों के अनुरूप बनाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा राहत दिशानिर्देशों के तहत 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर सहायता दी जाती है, जबकि सूखा मैनुअल में 50 प्रतिशत फसल नुकसान होने पर ही गंभीर सूखे की श्रेणी में माना जाता है।

इसके अलावा उन्होंने केंद्र से सूखे का आकलन करने में अधिक लचीलापन अपनाने, वैज्ञानिक आधार पर कम अवधि के सूखे को भी मान्यता देने और सूखे की जल्द घोषणा से जुड़े नियमों में बदलाव करने की मांग की, ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके।

जी. परमेश्वर ने केंद्र सरकार से यह भी अपील की कि मौजूदा हालात को 'राष्ट्रीय महत्व की आपदा' घोषित करने या उसी स्तर की सहायता प्रदान करने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र का समय पर हस्तक्षेप लाखों किसानों को राहत देने, राज्य में पेयजल संकट से निपटने और सार्वजनिक जल आपूर्ति पर निर्भर करोड़ों लोगों को सुरक्षा देने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी