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अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मामले में पुलिस कार्रवाई पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

बेंगलुरु, 28 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य पुलिस की कड़ी आलोचना की। पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी जिसने अधिकारियों को कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी थी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि शिकायत करने वाले की स्थिति की पुष्टि किए बिना आपराधिक कार्यवाही कैसे शुरू की गई और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तय प्रक्रियाओं के अनुसार अवैध निवासियों के खिलाफ कार्रवाई करें।
 

बेंगलुरु, 28 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य पुलिस की कड़ी आलोचना की। पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी जिसने अधिकारियों को कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी थी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि शिकायत करने वाले की स्थिति की पुष्टि किए बिना आपराधिक कार्यवाही कैसे शुरू की गई और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तय प्रक्रियाओं के अनुसार अवैध निवासियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

बेंगलुरु शहर की बेलंदूर और वर्तुर पुलिस पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। पुलिस ने कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत पर बिना शुरुआती जांच किए ही नागेंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी।

खबरों के मुताबिक, नागेंद्र ने पुलिस को इलाके में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद, उन प्रवासियों ने उन पर मारपीट का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।

अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए, नागेंद्र ने इसे रद्द कराने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह याचिका जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई।

पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए, हाई कोर्ट ने सवाल किया कि सिर्फ उन लोगों की शिकायत के आधार पर एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है, जिन्होंने खुद अपनी शिकायत में कहा था कि वे पिछले चार सालों से अपने परिवारों के साथ शहर में रह रहे हैं।

कोर्ट ने पाया कि नागेंद्र के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने से पहले पुलिस शिकायतकर्ताओं की स्थिति की पुष्टि करने में नाकाम रही। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर अवैध प्रवासियों को इस तरह का समर्थन दिया गया, तो वे 'मशरूम की तरह फैल जाएंगे', और पुलिस विभाग के कामकाज पर सवाल उठाए।

बेंच ने अवैध प्रवासियों को मिल रहे कथित सिस्टमैटिक समर्थन पर भी चिंता जताई और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार काम करें और अवैध निवासियों को उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करें।

हाई कोर्ट ने अधिकारियों को अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए उचित कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया। साथ ही, कोर्ट ने कथित अवैध प्रवासियों की शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने राज्य सरकार और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) को नोटिस जारी किए और मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त तक के लिए टाल दी।

--आईएएनएस

एससीएच