नवंबर के अंत तक तुमकुरु पहुंचेगा एत्तिनहोले परियोजना का पानी, मंत्री ने किया वादा
तुमकुरु, 17 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक की महत्वाकांक्षी एत्तिनहोले परियोजना का पानी नवंबर के अंत तक तुमकुरु तक पहुंचा दिया जाएगा। राज्य के जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने गुरुवार को यह वादा किया।
मंत्री ने गुब्बी तालुक के कंचीगनहल्ली में इस परियोजना के पैकेज-11 के तहत चल रहे कामों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बता दें कि येतिनहोले इंटीग्रेटेड ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट कर्नाटक की एक बड़ी जलापूर्ति परियोजना है। इसका मकसद नेत्रावती नदी की सहायक नदी येतिनहोले का पानी पूर्वी और मध्य कर्नाटक के सूखा प्रभावित जिलों में पीने के पानी के लिए पहुंचाना है।
मंत्री ने कहा कि तुमकुरु खंड का काम 15 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा और उन्होंने 100 प्रतिशत नियोजित जलापूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।
चेलुवरायस्वामी ने कंचीगनहल्ली में निर्माण स्थल का खुद निरीक्षण किया, जहां वन विभाग की 1.9 किलोमीटर जमीन पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए जरूरी स्टेज-2 वन मंजूरी से जुड़ी फाइलें नई दिल्ली पहुंच चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि वन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने दिल्ली में आवेदन जमा कर दिया है और उन्हें भरोसा है कि लगातार प्रयासों के बाद एक हफ्ते के भीतर केंद्र से अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।
मंत्री ने अधिकारियों को ग्रेविटी कैनाल के निर्माण में गुणवत्ता को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस जगह पर 28 मीटर गहरी खुदाई का काम जरूरी है और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि मिट्टी धंसे नहीं। उन्होंने कट-एंड-कवर तकनीक अपनाने और काम को जरूरी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि खुदाई से निकली मिट्टी को अस्थायी रूप से रखने के लिए आवंटित 10 एकड़ अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल किया जाए और काम पूरा होने के बाद उसी मिट्टी का इस्तेमाल भराई के लिए सही तरीके से किया जाए।
चेलुवरायस्वामी ने बताया कि दो जगहों पर नहर का निर्माण तेजी से चल रहा है और तुमकुरु हिस्से को तय समय में पूरा कर लिया जाएगा।
मीडिया से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि एत्तिनहोले परियोजना पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू किया गया एक ड्रीम प्रोजेक्ट है।
उन्होंने कहा कि परियोजना की अनुमानित लागत जो शुरू में करीब 8,000 करोड़ रुपये थी, अब बढ़कर 23,000 करोड़ रुपये हो गई है। लागत बढ़ने के बावजूद सरकार किसानों के हित में इसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि बिक्केगुड्डा परियोजना, जो अपरिहार्य कारणों से देरी से चल रही थी, अगले दो महीनों में पूरी कर दी जाएगी।
किसानों की हेमावती लिंक कैनाल परियोजना को छोड़ने की मांग पर जवाब देते हुए चेलुवरायस्वामी ने कहा कि सरकार संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी। उन्होंने कहा, "तुमकुरु और रामनगर दोनों के किसान हमारे लिए बराबर हैं। सभी हमारे अपने हैं। हम मुख्यमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे और बिना किसी के साथ अन्याय किए सभी के हित में उचित कदम उठाएंगे।"
मंत्री ने किसानों के आर्थिक शोषण पर भी चिंता जताई और उनसे माइक्रोफाइनेंस संस्थानों से कर्ज पर निर्भर न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि माइक्रोफाइनेंस संस्थानों द्वारा कथित उत्पीड़न के बारे में कुछ ही किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है और लिखित शिकायतों के बिना सरकार के लिए ऐसी संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल है। उन्होंने किसानों से सतर्क रहने और कर्ज के जाल में न फंसने का आग्रह किया।
निरीक्षण के दौरान गुब्बी विधायक और केएसआरटीसी कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष पी. वासु और जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
--आईएएनएस
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