कर्नाटक सरकार ने अधिकारियों को मेकेदातु प्रोजेक्ट में तेजी लाने का निर्देश दिया
बेंगलुरु, 4 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने शुक्रवार को अधिकारियों को मेकेदातु प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में तेजी लाने और जिला प्रशासन को मुआवजे के तौर पर उपयुक्त वैकल्पिक जमीन की जल्द से जल्द पहचान करने का निर्देश दिया।
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि तमिलनाडु इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है।
मंत्री ने शुक्रवार को यहां विकास सौधा में सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और जोर दिया कि सरकार जल्द से जल्द इसकी आधारशिला रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
चेलुवरयास्वामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उस वन भूमि के बदले वैकल्पिक जमीन की पहचान करें जो प्रोजेक्ट के कारण जलमग्न हो जाएगी और बिना देरी किए रिपोर्ट सौंपें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में रिहायशी इलाकों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए और केवल 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' (वन क्षेत्र के रूप में मानी जाने वाली जमीन) और राजस्व विभाग की जमीन की ही पहचान की जानी चाहिए।
इस प्रोजेक्ट के कारण लगभग 5,096 हेक्टेयर वन भूमि के जलमग्न होने की आशंका है, जिसके लिए राज्य सरकार को मुआवजे के तौर पर जमीन उपलब्ध करानी होगी।
रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने पहले ही लगभग 20,000 हेक्टेयर जमीन की पहचान कर ली है, लेकिन जंगल बढ़ाने के लिए उपयुक्त लगभग 5,000 हेक्टेयर जमीन प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
चूंकि 'डीम्ड फॉरेस्ट' (माना गया जंगल) जमीन रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए अधिकारियों ने चामराजनगर, मांड्या और बेंगलुरु साउथ जिलों में 1:2 के अनुपात में मुआवजे के तौर पर जमीन की पहचान करने की संभावना पर चर्चा की।
बैठक में संबंधित विभाग की मंजूरी मिलने पर, अकेले मांड्या जिले में उपलब्ध लगभग 30,000 हेक्टेयर 'डीम्ड फॉरेस्ट' जमीन से ही पूरी जरूरत को पूरा करने की संभावना पर भी चर्चा की गई।
अगर सिर्फ रेवेन्यू डिपार्टमेंट की जमीन पर विचार किया जाए तो मंत्री ने सभी जिलों को उस जमीन के बराबर जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया जो प्रोजेक्ट के कारण डूब जाएगी।
मांड्या के डिप्टी कमिश्नर ने बैठक में बताया कि जिले से 772 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने की तैयारी पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी जरूरत 'डीम्ड फॉरेस्ट' जमीन से पूरी करनी होगी।
चित्रदुर्ग, रायचूर, दावणगेरे, बागलकोट, यादगीर, हावेरी, गदग, विजयनगर, बेंगलुरु, रूरल, और चामराजनगर जिलों ने पहले ही 'सी और डी' कैटेगरी की जमीनों का सर्वे कर लिया है और उपलब्ध जमीन के बारे में रिपोर्ट सौंप दी है।
मांड्या के डिप्टी कमिश्नर को रेवेन्यू डिपार्टमेंट की जमीन के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। मंत्री ने फॉरेस्ट लैंड से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक और सीनियर ऑफिसर को नोडल ऑफिसर नियुक्त करने का निर्देश दिया।
राज्य के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी 7 सितंबर को दिल्ली का दौरा करेंगे। 8 सितंबर को होने वाली बातचीत से यह साफ होने की उम्मीद है कि क्या 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' (माना गया वन क्षेत्र) को 'कम्पेन्सेटरी लैंड' (बदले में दी जाने वाली जमीन) के तौर पर माना जा सकता है।
--आईएएनएस
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