कर्नाटक के गवर्नर ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंता जताई
बेंगलुरु, 16 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को राज्य के महत्वाकांक्षी योजनाओं में हो रही देरी के लिए पत्र लिखा है। गर्वनर ने अपने पत्र में बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (बीएमआईसी/एनआईसी) प्रोजेक्ट और बिदादी में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) को लेकर चिंता जताई है।
इस इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट का प्रबंधन नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (एनआईसी) करती है, जो एक प्राइवेट कंपनी है।
गवर्नर ने कहा है कि उन्हें अब्राहम टीजे और बैरामंगला व कुंचागरनहल्ली पंचायतों के किसान कल्याण संघ से एक विस्तृत ज्ञापन मिला है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि बीएमआईसी प्रोजेक्ट के तहत पेरिफेरल और लिंक सड़कों और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग 376 एकड़ सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया गया था। जबकि लगभग 6,757 एकड़ सरकारी जमीन का इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह अभी भी एनआईसी से जुड़ी कंपनियों या अन्य प्राइवेट पार्टियों के कब्जे या नियंत्रण में हो सकती है वो बिना किसी कानूनी अधिकार के।
उन्होंने प्रस्तावित जीबीआईटी-बिदादी प्रोजेक्ट को लेकर भी चिंता जताई है। खबरों के अनुसार, इसके लिए नौ गांवों में फैली लगभग 7,431 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अधिग्रहण के लिए चुनी गई जमीन पर बड़े पैमाने पर खेती और उससे जुड़ी गतिविधियां होती हैं।
उन्होंने कहा है कि इस प्रोजेक्ट से 5.03 लाख से ज्यादा फल देने वाले पेड़, सालाना लगभग 49.4 लाख लीटर दूध का उत्पादन, 8,400 से ज्यादा पशु, खेती के लिए लगभग 840 एकड़ जमीन, रेशम किसानों की मदद करने वाली 501 एकड़ शहतूत की खेती और लगभग 12,400 पेड़ों वाले सोशल फॉरेस्ट्री प्लांटेशन पर असर पड़ सकता है।
इस ज्ञापन को मुख्य सचिव को भेजते हुए गहलोत ने मामले की जांच और उचित कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने इस इलाके में जमीन के इस्तेमाल, खेती और आजीविका से जुड़े मुद्दों के महत्व पर जोर दिया है।
इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने लंबे समय से अटके बीएमआईसी/एनआईसी प्रोजेक्ट को राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया था।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि 111 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का 25 सालों में सिर्फ एक किलोमीटर ही बन पाया है, जबकि प्राइवेट कंपनियां इससे फायदा उठा रही हैं।
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी कर्नाटक सरकार से कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट को अपने हाथ में ले और अतिरिक्त जमीन वापस ले।
राज्य सरकार ने कहा था कि वह इस मामले में कानूनी तौर पर आगे बढ़ेगी।
--आईएएनएस
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