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कर्नाटक के सूखा राहत के लिए 22,400 करोड़ की मांग, डिप्टी सीएम ने पीएम मोदी से मांगा मिलने का समय

बेंगलुरु, 3 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से 22,400.58 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जल्द मंजूर करने और जारी करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। साथ ही उन्होंने तीनों नेताओं से मुलाकात के लिए तत्काल समय देने का अनुरोध किया है, ताकि राज्य की स्थिति से उन्हें व्यक्तिगत रूप से अवगत करा सकें।
 

बेंगलुरु, 3 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से 22,400.58 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जल्द मंजूर करने और जारी करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। साथ ही उन्होंने तीनों नेताओं से मुलाकात के लिए तत्काल समय देने का अनुरोध किया है, ताकि राज्य की स्थिति से उन्हें व्यक्तिगत रूप से अवगत करा सकें।

परमेश्वर ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने कर्नाटक के सूखा प्रभावित किसानों के लिए केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप और वित्तीय सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि राज्य के 226 तालुक सूखे से प्रभावित हैं। करीब 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा है और इससे अनुमानित 62,481.88 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। राज्य के किसान अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के मानदंडों में संशोधन के बाद कर्नाटक की सूखा राहत की जरूरत बढ़कर 22,400.58 करोड़ रुपये हो गई है। हालांकि, संशोधित सहायता मानदंड खेती की वास्तविक लागत और किसानों को हुए नुकसान के मुकाबले अब भी अपर्याप्त हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन मानदंडों पर दोबारा विचार करने, किसानों की पहचान के लिए कर्नाटक के फ्रूट्स डेटाबेस जैसे अद्यतन कृषि रिकॉर्ड को स्वीकार करने और संशोधित मांग को जल्द मंजूरी देकर सहायता राशि जारी करने का आग्रह किया।

परमेश्वर ने कहा कि किसानों को केवल मामूली राहत नहीं, बल्कि समय पर पर्याप्त सहायता की जरूरत है, ताकि वे अपनी आजीविका दोबारा खड़ी कर सकें। किसानों के भविष्य की रक्षा करना राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केंद्र और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

अपने पत्रों में परमेश्वर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 26 अक्टूबर को जारी अधिसूचना का उल्लेख किया है। इसमें वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के तहत मुआवजे के मानदंडों में संशोधन किया गया है।

संशोधित मानदंडों के अनुसार, फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी के तहत कर्नाटक की सहायता की जरूरत 6,128.70 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,943.55 करोड़ रुपये हो गई है। यानी इसमें 1,814.85 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत है। इसके परिणामस्वरूप राज्य की कुल सूखा राहत मांग 20,585.73 करोड़ रुपये से बढ़कर 22,400.58 करोड़ रुपये हो गई है। पुराने ज्ञापन के अन्य सभी मदों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

परमेश्वर ने मुआवजे के मानदंडों में संशोधन के केंद्र के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि किसानों की आर्थिक परेशानियों और खेती की लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए सहायता में की गई वृद्धि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी आपदाओं की तीव्रता भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि संशोधित मानदंडों के तहत वर्षा आधारित फसलों के लिए 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसलों के लिए 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा तय किया गया है। हालांकि, बीज, उर्वरक, कृषि मजदूरी, सिंचाई और खेती से जुड़ी अन्य आवश्यक लागतों की तुलना में यह राशि पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि मुआवजे के मानदंड वर्ष 2026 की कृषि लागत और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप होने चाहिए। यदि किसानों की वास्तविक लागत और उन्हें हुए नुकसान को ध्यान में नहीं रखा जाता है, तो उन्हें उचित राहत नहीं मिल पाएगी।

उपमुख्यमंत्री ने सूखा राहत के पात्र किसानों की पहचान के लिए 2015-16 की कृषि जनगणना के आंकड़ों के लगातार इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पुराने आंकड़े किसानों की मौजूदा भूमि जोत और कृषि परिस्थितियों की सही तस्वीर पेश नहीं करते। इसके कारण पात्र छोटे और सीमांत किसान सरकारी सहायता से वंचित रह सकते हैं।

उन्होंने केंद्र से कर्नाटक सरकार के फ्रूट्स डेटाबेस के इस्तेमाल पर विचार करने का आग्रह किया। इस डेटाबेस में किसानों से जुड़ी अद्यतन और सत्यापित जानकारी उपलब्ध है, जिससे पात्र लाभार्थियों की पहचान करना आसान हो सकता है। परमेश्वर ने केंद्र से मौजूदा आपदा राहत व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने और खेती की वास्तविक लागत, भूमि जोत के अद्यतन रिकॉर्ड, किसानों की आजीविका की सुरक्षा तथा चरम मौसमी घटनाओं से होने वाले बढ़ते नुकसान को ध्यान में रखते हुए मुआवजे के मानदंड तैयार करने की मांग की।

वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि एक मानसून की विफलता किसानों की वर्षों की मेहनत बर्बाद कर सकती है, उनकी पारिवारिक बचत खत्म कर सकती है और किसानों की पूरी पीढ़ी के भविष्य को अनिश्चितता में डाल सकती है, तो विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से कर्नाटक की संशोधित सूखा राहत मांग पर विचार करने, राज्य की ओर से सौंपे गए संशोधित ज्ञापन की जांच में तेजी लाने और निर्धारित मानदंडों के अनुसार पात्र सहायता को जल्द मंजूरी देकर जारी करने का आग्रह किया।

परमेश्वर ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के रास्ते में राजनीतिक और प्रशासनिक मतभेद नहीं आने चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार को सहकारी संघवाद की भावना के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति बेहद गंभीर है और केंद्र की ओर से भी उसी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया दिए जाने की जरूरत है, ताकि संकट का सामना कर रहे किसानों तक समय पर सहायता पहुंच सके।

--आईएएनएस

डीएससी