कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री ने केंद्र को लिखा पत्र, सूखे के लिए 20,585 करोड़ रुपए की राशि देने की मांग
बेंगलुरु, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया है कि राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के तहत 20,585 करोड़ रुपए से अधिक की राशि को तुरंत मंजूरी दी जाए और जारी की जाए।
जी. परमेश्वर ने अपने पत्रों में सूखे की गंभीरता को बताते हुए कहा कि 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान कर्नाटक में बारिश में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्य में सामान्य 852 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 551 मिमी बारिश हुई। यह 1956 के बाद से दूसरी सबसे कम और 1901 के बाद से सातवीं सबसे कम मानसून बारिश है।
कर्नाटक सरकार ने 226 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। राज्य में 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें 53.92 लाख हेक्टेयर में कृषि फसलें और 4.01 लाख हेक्टेयर में बागवानी फसलें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कृषि इनपुट लागत के आधार पर कुल आर्थिक नुकसान 62,481.88 करोड़ रुपए आंका गया है।
राज्य ने केंद्र से 20,585.73 करोड़ रुपए की सहायता की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसमें फसल नुकसान के लिए 6,128.70 करोड़ रुपए की इनपुट सब्सिडी, 61.91 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका के लिए 12,146.99 करोड़ रुपए की सहायता, पेयजल आपूर्ति के लिए 1,727 करोड़ रुपए और पशुपालन और पशुधन सुरक्षा के लिए 583.04 करोड़ रुपए की मांग शामिल है।
जी. परमेश्वर ने विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता देने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है। आजीविका सहायता की गणना 60 दिनों के लिए 327 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से की गई है। राज्य ने पशुधन की सुरक्षा के लिए 476 पशु शिविर और 583 चारा बैंक स्थापित करने के वास्ते भी केंद्र से मदद मांगी है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी तय करने के लिए 2015-16 के पुराने कृषि जनगणना डेटा का उपयोग जारी रखने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुराने डेटा के आधार पर गणना करने से कर्नाटक को मिलने वाली सहायता में लगभग 1,669.50 करोड़ रुपए की कमी आ सकती है।
उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि वह राज्य के अपडेटेड 'फार्मर्स रजिस्ट्रेशन एंड यूनिफाइड बेनिफिशियरी इंफॉर्मेशन सिस्टम' (एफआरयूआईटीएस) डेटाबेस का उपयोग करे, ताकि लाभार्थी किसानों की सही पहचान की जा सके और उनकी राहत संबंधी जरूरतों का आकलन किया जा सके।
राज्य ने पीएम पोषण योजना के तहत 427.20 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि की भी मांग की है, ताकि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सूखे से प्रभावित इलाकों के स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा जरूरतमंद लाभार्थियों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 'सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम' (पूरक पोषण कार्यक्रम) के तहत 70.96 करोड़ रुपए की मांग की गई है।
खेती की लागत में लगातार हो रही वृद्धि और 16वें वित्त आयोग की अवधि को देखते हुए परमेश्वर ने फसल के नुकसान पर मिलने वाली इनपुट सब्सिडी के मौजूदा नियमों में संशोधन की भी मांग की।
सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए 3 से 6 अक्टूबर तक कर्नाटक के दौरे पर आई 'इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम' (आईएमसीटी) का जिक्र करते हुए जी. परमेश्वर ने केंद्र से राज्य के व्यापक राहत ज्ञापन की जांच प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया।
उन्होंने मांग की कि इस टीम की सिफारिशें जल्द से जल्द उच्च-स्तरीय समिति को सौंपी जाएं और आवश्यक वित्तीय सहायता को बिना किसी देरी के मंजूरी देकर जारी किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों का कल्याण राजनीतिक और प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर है। केंद्र और राज्य सरकारों को 'सहयोगात्मक संघवाद' की भावना के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
देश की ताकत के रूप में किसानों के महत्व पर जोर देते हुए, परमेश्वर ने कहा कि कृषि पर निर्भर आजीविका को बचाने और सूखे के कारण किसानों को हो रही कठिनाइयों से उबारने के लिए समय पर वित्तीय सहायता मिलना बहुत जरूरी है।
--आईएएनएस
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