कर्नाटक सरकार की मांग, पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य हो एथेनॉल मिश्रण की जानकारी; ‘मिशन निखारा’ के तहत होगी जांच
बेंगलुरु, 6 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की मांग की है, ताकि उपभोक्ता ईंधन खरीदते समय सही जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें। राज्य में विभिन्न पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच में कथित तौर पर एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाए जाने के बाद सरकार ने यह मांग उठाई है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले एवं विधिक माप विज्ञान मंत्री रिजवान अरशद ने शुक्रवार को 'मिशन निखारा' के तहत ईंधन की गुणवत्ता और सही माप सुनिश्चित करने के लिए अभियान तेज करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पेट्रोल के नमूनों की जांच जारी रखेगी और गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई करेगी।
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के निर्देश पर विधिक माप विज्ञान विभाग ने निरीक्षण अभियान चलाया। इसके तहत बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए गए।
एनएबीएल से मान्यता प्राप्त और आईएसओ प्रमाणित प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के अनुसार, आईओसीएल के पेट्रोल में 31.2 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया, जबकि एचपीसीएल के एमजी-पावर में इसकी मात्रा 30.5 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह एचपीसीएल के पेट्रोल में 27 प्रतिशत, बीपीसीएल के एमएस स्पीड में 26.5 प्रतिशत, नायरा के पेट्रोल में 26.1 प्रतिशत और शेल के पेट्रोल में 25.5 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया।
अरशद ने कहा कि शुरुआत में नमूनों को आईओसीएल और बीपीसीएल की आंतरिक प्रयोगशालाओं में भेजा गया था, लेकिन रिपोर्ट में एथेनॉल की मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि यह निर्धारित जांच मानकों में शामिल है। उन्होंने तेल विपणन कंपनियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जा रहे ईंधन की संरचना जानने का अधिकार है।
मंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जा रहे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की वास्तविक मात्रा सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल आपूर्ति करने वाली तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और ऐसे पेट्रोल से वाहनों को हुए नुकसान के लिए उपभोक्ताओं को मुआवजा देने की भी मांग की। इसके लिए अधिकृत सर्विस सेंटर से नुकसान की पुष्टि कर समयबद्ध दावा निपटान प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
अरशद ने चेतावनी दी कि एथेनॉल की अधिक मात्रा से वाहनों का माइलेज कम हो सकता है और फिल्टर, फ्यूल पंप, इंजेक्टर, होज तथा सील जैसे पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने दावा किया कि भारत में अनुमानित 35 करोड़ वाहनों में से करीब 99 प्रतिशत वाहन ई20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। उनके अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद बेचे गए वाहन भी केवल ई20 के लिए प्रमाणित हैं।
मंत्री ने अनुमान जताया कि यदि माइलेज में 10 प्रतिशत की कमी आती है, तो सालाना 6,200 करोड़ लीटर ईंधन की खपत और 100 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत के आधार पर उपभोक्ताओं पर हर साल 62,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसके अलावा वाहनों की मरम्मत पर 39,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस तरह कुल आर्थिक बोझ 1.01 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रण से विदेशी मुद्रा की बचत होने का तर्क देती है, लेकिन इसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने इसके समर्थन में आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के वित्त वर्ष 2025-26 में दर्ज संयुक्त 77,821 करोड़ रुपये के मुनाफे का हवाला दिया।
अरशद ने कहा कि 'मिशन निखारा' के तहत पूरे कर्नाटक में निरीक्षण और ईंधन की गुणवत्ता की जांच जारी रहेगी। राज्य सरकार मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन तथा अनियमितताओं की रोकथाम) आदेश, 2005 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए गड़बड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। इसका उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की गुणवत्ता और बेचे जाने वाले प्रत्येक लीटर ईंधन की सही माप सुनिश्चित करना है।
--आईएएनएस
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