कांग्रेस की कर्नाटक में एसआईआर को टालने की मांग, बीएलओ लिस्ट में गड़बड़ियों का हवाला दिया
बेंगलुरु, 29 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया कि वे सीईओ की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित बूथ लेवल अधिकारियों और बीएलओ सुपरवाइजरों की जानकारी में कथित गड़बड़ियों को तुरंत ठीक करें और जब तक सही और सत्यापित जानकारी उपलब्ध न हो जाए, तब तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को टाल दें।
चुनाव आयोग ने राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके तहत, 29 जून से 29 जुलाई तक घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया जाएगा।
चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को सौंपे गए एक ज्ञापन में एमएलसी रमेश बाबू ने आरोप लगाया कि ऑफिशियल वेबसाइट पर बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर के बारे में अलग-अलग जानकारी दी गई है, जिससे वोटरों और राजनीतिक स्टेकहोल्डर्स के बीच कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है। उन्होंने सही जानकारी उपलब्ध होने तक एसआईआर को टालने की भी मांग की है।
ज्ञापन के अनुसार, सीईओ की वेबसाइट पर अभी दो अलग-अलग तरह की जानकारी मौजूद है। एक का टाइटल है "बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर लिस्ट, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर्स और बीएलओ सुपरवाइजर्स के नाम और मोबाइल नंबर हैं और दूसरी का टाइटल है "वोटर सुविधा केंद्रों, बीएलओ सुविधा केंद्रों और अधिकारियों के संपर्क विवरण की जानकारी", जिसमें भी बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर के नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल्स दी गई हैं।
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि दोनों लिस्ट के वेरिफिकेशन से गड़बड़ियां सामने आईं, जिसमें कई पोलिंग एरिया में एक ही बीएलओ और सुपरवाइजर के लिए अलग-अलग नाम और मोबाइल नंबर दिखाए गए। उन्होंने असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसी 128 और 153 का उदाहरण दिया, जहां अलग-अलग जानकारी पब्लिश की गई थी।
पार्टी का कहना है कि विरोधाभासी ऑफिशियल डेटा पब्लिश होने से मतदाताओं, राजनीतिक पार्टियों, बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए), चुनाव ऑब्जर्वर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के बीच गंभीर कन्फ्यूजन पैदा हुआ है।
ज्ञापन में कहा गया है कि एक लिस्ट के आधार पर बूथ लेवल ऑफिसर के पास जाने वाले वोटर को पता चल सकता है कि दूसरी लिस्ट में अन्य ऑफिसर दिखाया गया है। ऐसी विसंगतियां ऑफिशियल कॉन्टैक्ट डिटेल्स पब्लिश करने के मकसद को ही खत्म कर देती हैं और 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' को आसानी से लागू करने पर बुरा असर डालती हैं।
कांग्रेस ने तर्क दिया कि इलेक्टोरल रोल में बदलाव एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें चुनाव अधिकारियों की पहचान के बारे में सटीकता, पारदर्शिता और निश्चितता की जरूरत होती है। उनका कहना है कि अलग-अलग ऑफिशियल जानकारी से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम होता है और वोटर इलेक्टोरल रोल में नाम जुड़वाने, ठीक करवाने या हटवाने का सही तरीके से लाभ नहीं उठा पाते हैं।
कांग्रेस ने चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर से छह खास कदम उठाने की मांग की। पहली पब्लिश की गई दोनों लिस्ट के बीच गड़बड़ियों का तुरंत वेरिफिकेशन और सुधार, सही नामों, पद, पोलिंग स्टेशन की जानकारी और मोबाइल नंबर के साथ बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर की एक ही प्रमाणित और एक जैसी लिस्ट पब्लिश करना, ऑफिशियल वेबसाइट से किसी भी गलत या पुरानी लिस्ट को हटाना। जब तक सभी गड़बड़ियों को ठीक नहीं कर लिया जाता, सही लिस्ट की पहचान करते हुए सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए, एसआईआर को आगे बढ़ाने से पहले सभी बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर की कॉन्टैक्ट डिटेल्स का जिले-वार वेरिफिकेशन किया जाए। अगर गड़बड़ियों को तुरंत ठीक नहीं किया जा सकता है, तो एसआईआर को तब तक के लिए टाल दिया जाए, जब तक वेरिफाइड जानकारी प्रकाशित न हो जाए और सभी संबंधित लोगों के लिए उपलब्ध न हो जाए।
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष होनी चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखनी भी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि चुनाव अधिकारियों के बारे में अलग-अलग जानकारी पारदर्शिता और जनता के भरोसे पर बुरा असर डाल सकती है।
पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को जरूरी मानते हुए तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करें और की गई कार्रवाई की जानकारी जल्द से जल्द दें।
--आईएएनएस
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