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हत्या मामले में दोषसिद्धि के बाद कर्नाटक कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी अयोग्य घोषित

बेंगलुरु, 2 मई (आईएएनएस)। भाजपा नेता की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद कर्नाटक कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को विधानसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। कर्नाटक विधानसभा की ओर से 2 मई को जारी आधिकारिक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई।
 
हत्या मामले में दोषसिद्धि के बाद कर्नाटक कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी अयोग्य घोषित

बेंगलुरु, 2 मई (आईएएनएस)। भाजपा नेता की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद कर्नाटक कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को विधानसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। कर्नाटक विधानसभा की ओर से 2 मई को जारी आधिकारिक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई।

हालांकि अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि उनकी रिहाई के बाद भी छह वर्ष तक अयोग्यता लागू रहेगी, जब तक कि किसी सक्षम अदालत द्वारा उनकी सजा पर रोक नहीं लगा दी जाती।

यह अयोग्यता 15 अप्रैल से प्रभावी मानी गई है, जिस दिन उन्हें दोषी ठहराया गया था। यह कार्रवाई भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत की गई है। इसके साथ ही धारवाड़ विधानसभा सीट रिक्त घोषित हो गई है।

कर्नाटक विधानसभा सचिव एम.के. विशालाक्षी द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि धारवाड़ से विधायक रहे कुलकर्णी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ई) तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 के तहत दोषसिद्धि की तिथि से अयोग्य हो गए हैं।

विनय कुलकर्णी को बेंगलुरु सिटी के अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सत्र न्यायाधीश (सीसीएच-82) ने विशेष मामला संख्या 565/2021 में दोषी ठहराया था।

इस फैसले के बाद कर्नाटक विधानसभा की एक सीट आधिकारिक तौर पर खाली हो गई है।

गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर ने सोमवार को कहा था कि उनके कार्यालय को विनय कुलकर्णी को अयोग्य घोषित करने पर निर्णय तभी लेना होगा, जब उन्हें आजीवन कारावास की आधिकारिक सूचना प्राप्त होगी। उन्होंने मंगलुरु में पत्रकारों से कहा था, “जब तक सजा की आधिकारिक जानकारी नहीं मिलती, तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।”

विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विधायक पद से कुलकर्णी की अयोग्यता में देरी को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए थे।

पूर्व और वर्तमान सांसदों-विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत ने 15 अप्रैल को कुलकर्णी समेत 16 अन्य लोगों को भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

यह मामला वर्ष 2016 का है। विनय कुलकर्णी इस केस में आरोपी संख्या 15 थे। राज्य सरकार ने बाद में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया था। आरोप सामने आने के समय कुलकर्णी मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री थे।

योगेश गौड़ा की 15 जून 2016 को धारवाड़ शहर के एक जिम में हमलावरों के एक समूह ने हत्या कर दी थी। माना जाता है कि उन्होंने राजनीतिक रूप से कुलकर्णी को चुनौती दी थी, जिसके बाद यह घटना हुई।

कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और 2021 में जमानत मिली थी। उन पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगा, जिसके बाद सीबीआई ने जमानत रद्द करने की मांग की। अदालत ने यह मांग स्वीकार कर उनकी जमानत रद्द कर दी।

इसके बाद कुलकर्णी, जो वर्तमान में कर्नाटक अर्बन वॉटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष हैं, ने आत्मसमर्पण किया और बाद में फिर से जमानत पर रिहा हुए।

उन पर योगेश गौड़ा की हत्या की साजिश रचने का आरोप था। उस समय वह सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। नाम सामने आने के बावजूद शुरुआत में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

बाद में भाजपा ने इस मामले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने चुनावी सभाओं में कहा था कि भाजपा सत्ता में आई तो कुलकर्णी को जेल भेजा जाएगा।

इसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया और कुलकर्णी गिरफ्तार हुए। उन्होंने नौ महीने से अधिक समय जेल में बिताया और बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत हासिल की। फिलहाल कुलकर्णी बेंगलुरु सेंट्रल जेल में बंद हैं और उन्होंने दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए अपील भी दाखिल कर दी है।

--आईएएनएस

डीएससी