कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर विवाद: 35 पदों में एक भी महिला नहीं, केएन राजन्ना ने जताई आपत्ति
बेंगलुरु, 15 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने मंगलवार को पार्टी की ओर से 35 जिला इकाइयों के अध्यक्षों की हालिया नियुक्ति पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन पदों पर किसी भी महिला नेता को नियुक्त नहीं किया गया है।
राजन्ना पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को चुनौती दी थी और सिद्दारमैया की जगह किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की थी।
कहा जाता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ 'वोट चोरी' के मुद्दे पर टिप्पणी करने के बाद उन्हें उनके कैबिनेट पद से हटा दिया गया था।
राजन्ना ने मंगलवार को बेंगलुरु में केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के साथ बैठकों के दौरान ये मुद्दे उठाए। वे पहले सदाशिवनगर स्थित परमेश्वर के आवास पर उनसे मिले और बाद में हरिप्रसाद से उनके आवास पर मुलाकात की।
पत्रकारों से बात करते हुए राजन्ना ने कहा कि दोनों नेताओं के साथ उनकी चर्चा मुख्य रूप से उनके तुमकुरु जिले में पार्टी संगठन के बारे में थी।
उन्होंने कहा, "मैं केपीसीसी अध्यक्ष हरिप्रसाद और परमेश्वर से मिलने गया था। हमने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, मुख्य रूप से जिले में पार्टी संगठन के बारे में।"
राजन्ना ने कहा कि उन्होंने हरिप्रसाद का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि हाल ही में नियुक्त किए गए 35 जिला अध्यक्षों में से कोई भी महिला नहीं है।
उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें बताया कि हाल ही में नियुक्त किए गए 35 पार्टी जिला अध्यक्षों में कोई भी महिला उम्मीदवार नहीं है। मैंने उनसे कहा कि वे इन कमियों को एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और एआईसीसी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के ध्यान में लाएं, जो आज बेंगलुरु आ रहे हैं।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियुक्तियों में पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
राजन्ना ने कहा, "पिछड़े वर्गों से ताल्लुक रखने वाले नेता 35 में से केवल आठ हैं। इन आठ लोगों में भी उचित सामाजिक संतुलन (सोशल इंजीनियरिंग) नहीं बनाया गया है।"
उन्होंने कहा कि हरिप्रसाद ने उन्हें बताया कि उन्हें भी इन कमियों के बारे में पता है और वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक ये चिंताएं पहुंचाएंगे।
राजन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका अगला विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन वे भविष्य में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि परमेश्वर ने उनसे चुनाव लड़ने की उनकी योजनाओं के बारे में पूछा था और उनके फैसले की सराहना की थी।
राजन्ना ने कहा कि हरिप्रसाद के साथ उनके करीबी संबंध यूथ कांग्रेस के दिनों से हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1979 में हरिप्रसाद राज्य महासचिव थे, केजे जॉर्ज अध्यक्ष थे और वे खुद जिला अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने साथियों के तौर पर साथ काम किया था।
जब उनसे उन खबरों के बारे में पूछा गया कि कर्नाटक एपेक्स बैंक के अध्यक्ष का पद हारने के बाद वे नाराज थे तो राजन्ना ने कहा कि उनकी मुख्य चिंता किसी पद को पाने के बजाय सहकारी संस्थाओं का कामकाज थी।
उन्होंने कहा, "मैं 50 सालों से इस आंदोलन से जुड़ा हुआ हूं। किसी पद के लिए चुनाव लड़ना मेरे लिए कम महत्वपूर्ण बात है। मेरी दिलचस्पी सहकारी संस्थाओं में है, खासकर एपेक्स बैंक जैसी संस्था में, जिसे सरकार के साथ तालमेल बिठाकर काम करना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि सरकार हर साल किसानों के ब्याज के लिए हजारों करोड़ रुपए देती है और चेतावनी दी कि सरकार के साथ किसी भी तरह के टकराव का असर आखिरकार किसानों और सहकारी संस्था पर पड़ सकता है।
--आईएएनएस
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