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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की आलोचना की

बेंगलुरु, 15 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर अपनी आर्थिक विफलताओं को छिपाने के लिए आम नागरिकों पर बोझ डालने का आरोप लगाया।
 
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की आलोचना की

बेंगलुरु, 15 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर अपनी आर्थिक विफलताओं को छिपाने के लिए आम नागरिकों पर बोझ डालने का आरोप लगाया।

एक प्रेस विज्ञप्ति में सिद्धारमैया ने पेट्रोल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि को 'जनविरोधी निर्णय' बताया और आरोप लगाया कि इससे आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि करके एक बार फिर अपनी विफलताओं के लिए जनता को दंडित किया है। यह केवल मूल्य वृद्धि नहीं है; यह आम भारतीयों के दैनिक जीवन पर एक और सीधा हमला है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र की विफल विदेश नीति, खराब आर्थिक प्रबंधन और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में असमर्थता ने सारा बोझ नागरिकों पर डाल दिया है।

बेंगलुरु में ईंधन की कीमतों का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि पेट्रोल की कीमत 106 रुपए प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमत 94 रुपए प्रति लीटर के करीब है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस बढ़ोतरी से परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि इस वृद्धि से सब्जियों की कीमतें, किराने का सामान, दूध की कीमतें, निर्माण लागत, स्कूल वैन की फीस, टैक्सी और ऑटो का किराया, कृषि इनपुट लागत और लगभग हर आवश्यक वस्तु प्रभावित होगी। किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, घरेलू बजट चलाने वाली महिलाएं और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर कच्चे तेल की कम कीमतों के दौरान भारी कर वसूलने और उसका लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुंचाने का आरोप लगाया।

सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि जब कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने जनता को पूरी राहत नहीं दी। उसने भारी कर वसूल कर अपना खजाना भर लिया, लेकिन जब कीमतें बढ़ती हैं, तो बोझ तुरंत नागरिकों पर डाल दिया जाता है। यह शासन नहीं, बल्कि शोषण है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर महंगाई को नियंत्रित करने, रुपए की रक्षा करने और अर्थव्यवस्था को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में विफल रहने का आरोप भी लगाया।

सिद्धारमैया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आम नागरिकों की रक्षा करने की बजाय अपने 'पूंजीवादी मित्रों' की रक्षा करने में अधिक तत्परता दिखाते हैं।

--आईएएनएस

एमएस/