सिद्दारमैया का सारा ध्यान अब अपने बेटे के लिए एक महत्वपूर्ण पद सुरक्षित करने पर : भाजपा नेता आर. अशोक
बेंगलुरु, 2 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने मंगलवार को सिद्दारमैया पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का पद छोड़ने और डी.के. शिवकुमार को नेतृत्व सौंपने से पहले उन्होंने राज्य को गंभीर वित्तीय संकट में ला दिया था। सिद्दारमैया का अब सारा ध्यान अपने बेटे के लिए एक महत्वपूर्ण पद सुरक्षित करने पर केंद्रित है।
"कर्नाटक खंडहर में: सिद्दारमैया की शर्मनाक विरासत" शीर्षक वाले एक कड़े बयान में अशोक ने दावा किया कि सिद्दारमैया ने "कर्नाटक की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया और अपने उत्तराधिकारी के लिए एक आर्थिक रूप से संकटग्रस्त राज्य छोड़ गए।
कांग्रेस पार्टी द्वारा नेतृत्व परिवर्तन को सुचारू और व्यवस्थित बताने के दावे को खारिज करते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि सिद्दारमैया ने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए संघर्ष नहीं किया, क्योंकि वे राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति से अवगत थे।
अशोक ने आरोप लगाया, "असली कारण यह है कि सिद्दारमैया जानते थे कि वित्तीय स्थिति चरमरा रही है। उन्होंने जानबूझकर अपने उत्तराधिकारी के लिए एक दिवालिया राज्य छोड़ दिया।"
भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार पर कर्नाटक को "कर्ज के अथाह सागर" में धकेलने का आरोप लगाया और दावा किया कि विकास कार्य ठप्प हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रशासन की तुलना पिछली भाजपा सरकार से करते हुए कहा कि भाजपा ने इंस्फ्राटक्चर और विकास परियोजनाओं में भारी निवेश किया था।
अशोक ने आगे आरोप लगाया कि सरकारी बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण कई क्षेत्र वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। ठेकेदारों को पूर्ण किए गए कार्यों का भुगतान नहीं मिला है, बिजली वितरण कंपनियां (ईएसकॉम) गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही हैं और धन की कमी के कारण कल्याणकारी योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गृह लक्ष्मी योजना की किश्तें रोक दी गई हैं, शक्ति योजना के लिए धन उपलब्ध नहीं है, आरटीसी कर्मचारियों को उनके हक का भुगतान नहीं किया गया है और अन्नभाग्य योजना के लिए आवंटन में देरी हुई है।
कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं की व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि "अवैज्ञानिक" कल्याणकारी प्रतिबद्धताओं ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है और इसका बोझ अंततः नागरिकों पर उच्च करों के रूप में पड़ सकता है।
विपक्ष के नेता ने सिद्दारमैया की हालिया नई दिल्ली यात्राओं की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वे राज्य की वित्तीय चुनौतियों का समाधान करने के बजाय अपने बेटे के लिए राजनीतिक पद सुरक्षित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे थे।
अशोका ने आगे दावा किया कि कथित तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दबाव में सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाना अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के सदस्यों को नाराज कर रहा है और कर्नाटक कांग्रेस के भीतर आंतरिक संघर्ष को जन्म दे सकता है।
भाजपा की विपक्षी भूमिका को दोहराते हुए अशोक ने कहा कि पार्टी विधानसभा के भीतर और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को उठाएगी। भाजपा ठेकेदारों, आरटीसी कर्मचारियों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लंबित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अपना अभियान जारी रखेगी।
गौरतलब है कि निवर्तमान सिद्दारमैया ने कर्नाटक की "गारंटी योजनाओं" के कारण सरकारी खजाने के दिवालिया होने के दावों को खारिज करते हुए मजबूत राजकोषीय प्रदर्शन का हवाला दिया था। उन्होंने बताया कि जीएसटी संग्रह में कर्नाटक महाराष्ट्र के बाद राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर है।
सिद्दारमैया ने कहा कि कर्नाटक की 8.1 प्रतिशत की विकास दर राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने अपने ऋण प्रबंधन का बचाव करते हुए कहा कि राज्य का राजकोषीय घाटा राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम द्वारा निर्धारित 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर है और ऋण सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग 24.94 प्रतिशत है।
--आईएएनएस
ओपी/एएस
