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अगर कर्नाटक सरकार सूखे की घोषणा नहीं की तो 3 अगस्त से विरोध प्रदर्शन होगा: आर. अशोक

बल्लारी, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार तुरंत सूखे की घोषणा नहीं करती है तो वे 3 अगस्त से 'चलो होला गड्ढे' (खेतों और जमीनों की ओर) विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।
 

बल्लारी, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार तुरंत सूखे की घोषणा नहीं करती है तो वे 3 अगस्त से 'चलो होला गड्ढे' (खेतों और जमीनों की ओर) विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।

करेकल गांव का दौरा करने और फसल के नुकसान का जायजा लेने के बाद उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से बात की।

उन्होंने कहा, "भले ही सभी जिलों में सूखा पड़ा है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे घोषित नहीं किया है। अगर तुरंत सूखा घोषित नहीं किया गया तो हम सभी किसान के खेतों में बैठकर धरना देंगे। किसान परेशान हैं और विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। कहीं भी छोटा सा भी पौधा नहीं उगा है।"

अशोक ने आरोप लगाया कि बल्लारी के कांग्रेस विधायक फाइव-स्टार होटलों में रह रहे हैं, जबकि पूरे जिले में किसान बुआई नहीं कर पा रहे हैं। बुआई का काम सिर्फ 18 प्रतिशत ही हुआ है और 50 दिन बीत चुके हैं। मक्का और कपास जैसी फसलें बोई तो गईं, लेकिन पौधे नहीं उगे।

उन्होंने कहा, "अगर अब बारिश भी होती है, तो उसका कोई फायदा नहीं होगा। फिर भी कांग्रेस सरकार सूखा घोषित करने में देरी कर रही है।"

वित्त विभाग ने चेतावनी दी है कि आय कम है, इसलिए अगर सूखा घोषित किया जाता है, तो तुरंत राहत देनी होगी। बल्लारी तालुक में बुआई 14.56 प्रतिशत, कुरुगोडु में 5.32 प्रतिशत, सिरुगुप्पा में 52.79 प्रतिशत, संदूर में 67.33 प्रतिशत और काम्पली में 34.91 प्रतिशत हुई है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर बल्लारी में 38 प्रतिशत बुआई हुई है।

किसानों ने शिकायत की कि अधिकारी उनके दौरे के बाद ही आए। हालांकि तुंगभद्रा जलाशय में अभी 36 टीएमसी पानी है, लेकिन उसे छोड़ा नहीं गया है। भाजपा के कार्यकाल के दौरान, जब सिर्फ 26 टीएमसी पानी था, तब भी फसलों के लिए पानी छोड़ा गया था, इसलिए सभी भाजपा नेता अंजनेय मंदिर से जलाशय तक पदयात्रा करेंगे।

अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में खेत, खजाना और जलाशय सभी खाली हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी या पशुपालन के लिए कोई भी मंत्री आगे नहीं आया।

उन्होंने आगे कहा कि सूखा घोषित किए बिना ही केंद्र सरकार से 10,000 करोड़ रुपए की मांग की गई है। उन्होंने कहा, "सबसे पहले सूखे की स्टडी होनी चाहिए, एक रिपोर्ट तैयार करके केंद्र को भेजी जानी चाहिए। फिर अधिकारी इसकी स्टडी करेंगे और सभी राज्यों को मिलकर राहत दी जाएगी। इस प्रक्रिया के बारे में पता होने के बावजूद, कांग्रेस सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। जब सूखा घोषित किया जाएगा, तभी इंश्योरेंस कंपनियां आगे आएंगी।"

अशोका ने हर तालुक के लिए 50 करोड़ रुपए, पीने के पानी और चारे का इंतजाम करने और किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपए का मुआवजा देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि किसानों ने प्रति एकड़ 30,000–40,000 रुपए और बीज के लिए 3,000 रुपए प्रति किलो खर्च किए थे।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पिछली यूपीए सरकार की तुलना में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के तहत ज्यादा राहत दी है। उन्होंने कहा कि अगर तुरंत लागू किया जाए, तो प्रति किसान 1 लाख रुपए तक का कर्ज माफ करना फायदेमंद होगा।

अशोका ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के दौरे की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि इसका मकसद मेकेदातु प्रोजेक्ट का विरोध करना और कावेरी का पानी न छोड़ना था।

उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकें सिर्फ पब्लिसिटी के लिए होती हैं।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि किसानों के खेतों में पौधों पर धूल जम रही है और वीरपुर झील का पानी प्रदूषित हो गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह विधानसभा सत्र में ये मुद्दे उठाएंगे।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी