कर्नाटक: सीईओ कार्यालय में प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, सीएम डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी की मांग
बेंगलुरु, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा। भाजपा ने सवाल उठाया कि पुलिस ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करने की अनुमति कैसे दी।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की जाए।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवादी नारायणस्वामी, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं विधायक सीएन अश्वत्थ नारायण, सांसद पीसी मोहन, एमएलसी सीटी रवि, वेंकटेश डोड्डेरी और हरीश एस. सहित अन्य प्रमुख नेताओं ने किया।
भाजपा की ओर से सौंपे गए ज्ञापन का शीर्षक था, "सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति दिए जाने पर आपत्ति।"
आर. अशोक ने कहा, "मैं उस घटना पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराता हूं, जिसमें मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों और पार्टी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में प्रदर्शन किया। यह एक गंभीर घटनाक्रम है।"
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) मामले में बेंगलुरु के निर्धारित फ्रीडम पार्क परिसर के अलावा अन्य स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और धरना देने पर रोक लगाई थी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था।
अशोक ने कहा, ''मुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके सहयोगियों ने अदालत के आदेश की अनदेखी की है। बिना अनुमति सीईओ कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है।''
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग न तो किसी राजनीतिक दल और न ही सरकार के अधीन है, बल्कि यह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।
अशोक ने कहा, ''इसके परिसर में राजनीतिक उद्देश्य से किए गए प्रदर्शन की अनुमति देना चुनाव आयोग के अधिकार और लोगों के विश्वास को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।''
चलवादी नारायणस्वामी ने कहा, ''यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के उल्लंघन का स्पष्ट मामला है और अदालत की अवमानना के दायरे में आता है। इसी आधार पर हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।''
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य चुनाव आयोग के परिसर में प्रदर्शन करने की अनुमति किसने दी और क्या इसके लिए लिखित अनुमति दी गई थी।
उन्होंने कहा, ''अगर लिखित अनुमति दी गई थी तो उससे जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। क्या पुलिस विभाग विपक्षी दलों या आम लोगों को भी चुनाव आयोग परिसर में इसी तरह प्रदर्शन करने की अनुमति देगा?''
भाजपा ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस और चुनाव आयोग के अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी ने सीसीटीवी फुटेज, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था का विवरण, प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की भी मांग की।
भाजपा ने अपने ज्ञापन में मामले में तत्काल कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की।
--आईएएनएस
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