मैसूरु दशहरा में मंत्रियों को रोके जाने पर कर्नाटक भाजपा का सरकार पर हमला, पूछा-कौन है इसके पीछे
बेंगलुरु, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिस अधीक्षक (एसपी) सीबी रिश्यंथ द्वारा कथित तौर पर तीन मंत्रियों को जंबू सवारी जुलूस के दौरान होने वाली नंदी ध्वज पूजा में भाग लेने से रोकने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने कहा कि इससे सरकार के सामाजिक न्याय के दावों की हकीकत सामने आ गई है।
यह घटना 21 अक्टूबर को मैसूरु महल परिसर स्थित कोटे अंजनेय स्वामी मंदिर के पास हुई। बताया गया कि मंत्रियों शिवराज तंगडगी, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा को पुलिसकर्मियों ने कार्यक्रम में प्रवेश से रोक दिया था।
एक बयान में आर अशोक ने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर कांग्रेस सरकार के सामाजिक न्याय संबंधी दावों को खोखला साबित कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस अधिकारियों की इस कार्रवाई के पीछे किसी उच्च स्तर के निर्देश थे।
उन्होंने कहा, "अगर पुलिस अधिकारी सरकार में वरिष्ठ पदों पर बैठे मंत्रियों को सार्वजनिक रूप से रोकने की हिम्मत कर रहे हैं, तो इसके पीछे कौन है? क्या ऊपर से कोई गुप्त निर्देश दिए गए थे।"
अशोक ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि जिन तीन मंत्रियों को रोका गया, वे सभी दलित समुदाय से थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सिर्फ संयोग था या फिर दलित नेताओं को कमजोर करने की एक सुनियोजित कोशिश।
उन्होंने कहा कि घटना के बाद लोगों में आक्रोश फैलने पर सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं लेकिन यह जवाबदेही तय करने के बजाय आलोचना से बचने की कोशिश लगती है।
कांग्रेस पर दलित मुद्दों का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाते हुए अशोक ने कहा कि पार्टी सामाजिक न्याय पर बड़े-बड़े भाषण देती है लेकिन उसी सरकार में तीन दलित मंत्रियों को अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, "अगर अनुसूचित समुदायों के साथ खड़े होने का दावा करने वाली सरकार में मंत्रियों के साथ ही ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी?"
अशोक ने कहा कि अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस घटना की जिम्मेदारी लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि जांच के नाम पर मामले को दबाने की कोई भी कोशिश दलित समुदाय और जनता की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दे सकती है।
भाजपा नेता ने मैसूरु दशहरा की व्यवस्थाओं को लेकर भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के इस पारंपरिक उत्सव का उचित प्रबंधन करने में विफल रही है।
अशोक ने दावा किया कि 2,000 रुपए का टिकट खरीदने वाले कई लोग भी समारोह देखने के लिए प्रवेश नहीं कर सके। उन्होंने इसे प्रशासनिक अव्यवस्था और लापरवाही का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, "दशहरा जनता का उत्सव है, सरकार के प्रचार का मंच नहीं।"
अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार आत्म-प्रचार, राजनीतिक लाभ और सत्ता के अहंकार में व्यस्त है जबकि आम लोगों की सुविधाओं, सुरक्षा और जरूरी व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि उत्सव देखने आए लोगों को हो रही परेशानियों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और सरकार से मांग की कि जनता के लिए बेहतर इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को इस घटना की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
शिवकुमार ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने बालकृष्ण, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा समेत मंत्रियों को नंदी ध्वज पूजा में शामिल होने के लिए स्थल में प्रवेश से रोककर अहंकारी व्यवहार किया।
उन्होंने कहा, "मैंने तुरंत व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और मंत्रियों के प्रवेश की व्यवस्था कराई। लेकिन अधिकारियों का यह मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसलिए मैंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।"
--आईएएनएस
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