मध्य प्रदेश में खाद वितरण को लेकर कमलनाथ का निशाना, बोले- सर्वर फेल और ई-टोकन सिस्टम से किसान परेशान
भोपाल, 7 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को खाद वितरण में बार-बार आ रही समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पर्याप्त स्टॉक होने के दावों के बावजूद, किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है, सर्वर फेल होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और ई-टोकन सिस्टम के कारण भी उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि हर साल किसानों को खाद के लिए संघर्ष करना पड़ता है। गोदामों के बाहर लंबी कतारें, कालाबाजारी और नकली खाद की आपूर्ति उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने के आश्वासन के बावजूद, इस साल भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
कमलनाथ ने कहा, "मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को समस्याएं पैदा करने के लिए गोल्ड मेडल मिलना चाहिए। इस पार्टी ने हर सिस्टम को बर्बाद करने में महारत हासिल कर ली है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वर डाउन होने, खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी और वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मिलने में देरी के कारण ई-टोकन सिस्टम में एक बार फिर तकनीकी दिक्कतें आ गई हैं।
कमलनाथ ने किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद पहले ई-टोकन सिस्टम को रोके जाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने बिना किसी उचित तकनीकी सुधार के इसे फिर से लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों के कारण किसान पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में खाद पाने के लिए उन्हें अतिरिक्त तकनीकी बाधाओं से नहीं जूझना पड़ना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा, "किसानों को तकनीकी समस्याओं से जूझने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। वे पहले से ही सरकारी नीतियों के कारण परेशान हैं।"
कमलनाथ ने मांग की कि राज्य सरकार खाद का सुचारू और पर्याप्त वितरण सुनिश्चित करे, ताकि यह समस्या हर साल आने वाले कृषि संकट का रूप न ले ले।
मध्य प्रदेश में खाद वितरण की व्यवस्था हमेशा से विवाद का विषय रही है। किसान अक्सर लंबी प्रतीक्षा अवधि और बुवाई के मौसम में खाद मिलने में आ रही दिक्कतों की शिकायत करते रहे हैं।
वहीं, भाजपा सरकार का कहना है कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
--आईएएनएस
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