जॉर्डन के राजदूत ने सीजफायर का स्वागत किया, खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों को बताया गलत (आईएएनएस इंटरव्यू)
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। यूसुफ अब्देलघानी, भारत में जॉर्डन के राजदूत ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि जॉर्डन शुरू से ही क्षेत्र में शांति और संवाद के जरिए समाधान का पक्षधर रहा है।
आईएएनएस से बातचीत में अब्देलघानी ने ईरान द्वारा खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे, तेल प्रतिष्ठानों और रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित करने की घटनाओं की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों का असर सिर्फ क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार और स्थिरता पर पड़ता है।
आईएएनएस: आप भारत-जॉर्डन के कूटनीतिक संबंधों को कैसे देखते हैं?
यूसुफ अब्देलघानी: भारत और जॉर्डन के रिश्ते “मजबूत और स्थायी” हैं, जो साझा मूल्यों और आपसी हितों पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने हाल ही में कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे किए हैं और द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 3 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
आईएएनएस: मिडिल ईस्ट में मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात के बीच भारत और जॉर्डन के बीच सहयोग कितना जरूरी है?
यूसुफ अब्देलघानी: यह बहुत जरूरी है, क्योंकि इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) की सफलता के लिए क्षेत्रीय स्थिरता बेहद जरूरी है। हम इस इलाके में स्थिरता के पक्षधर हैं; यही जॉर्डन और भारत समेत सभी देशों के लिए खुशहाली ला सकती है।
आईएएनएस: यूएस और ईरान के बीच चल रहे तनाव को आप कैसे देखते हैं, जिसमें अस्थायी संघर्ष विराम और भविष्य की शांति वार्ता शामिल है?
यूसुफ अब्देलघानी: जॉर्डन किसी भी सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं है और न ही वह अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ होने देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा संघर्ष विराम स्थायी रहेगा।
आईएएनएस: होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से ग्लोबल स्थिरता और व्यापार पर क्या असर पड़ा है?
यूसुफ अब्देलघानी: इसका असर पड़ रहा है। हमने पहले बाब अल-मंडेब और रेड सी में यह देखा है...मुझे लगता है कि इस इलाके के सभी देशों और पूरी दुनिया को इस बात का समर्थन करना चाहिए कि ये स्ट्रेट्स ट्रेड के लिए खुले हों और इसमें कोई भी रुकावट डालने से न सिर्फ इस इलाके के देश बल्कि पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा, ऐसा हमने देखा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों में बाधा आने से वैश्विक व्यापार बुरी तरह प्रभावित होता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इन्हें हर हाल में खुला रखना चाहिए।
आईएएनएस: क्या आपको लगता है कि वेस्ट एशिया में झगड़ा मुख्य रूप से तेल और गैस को लेकर है या जियोपॉलिटिकल असर और ग्लोबल स्टेज पर ताकत दिखाने को लेकर है?
यूसुफ अब्देलघानी: हम इस इलाके में तनाव के बारे में बहुत कुछ सुन रहे हैं। लेकिन, जॉर्डन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। हमारी विदेश नीति के मुख्य स्तंभ में से एक, जैसा कि हमारे किंग ने कहा, इस इलाके और उससे आगे शांति को बढ़ावा देना है। इसलिए, इस इलाके के कुछ देशों के जो भी तनाव या इरादे हैं, वे दबदबा बनाने या मिडिल ईस्ट का नक्शा बदलने के लिए हैं, हम उसे मंजूरी नहीं देते और हमें नहीं लगता कि ऐसा किया जा सकता है। हम इस इलाके में किसी भी तरह की दुश्मनी या स्टेटस को बदलने की किसी भी तरह की कोशिश का सपोर्ट नहीं करते। हमने पहले इराक में देखा था। जब इराक में पहला युद्ध हुआ था, जॉर्डन उसका हिस्सा नहीं था और हम पर बैन लगा दिया गया था क्योंकि हमने किसी भी देश को इराक के खिलाफ लॉन्चपैड के तौर पर अपनी जमीन या एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी थी। इतिहास ने साबित कर दिया कि हम सही थे क्योंकि इराक की तबाही और इराकी सेना को खत्म करने के बाद जो हुआ उससे दुनिया सहम गया। आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों का उदय हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी गलतियों को दोहराने से बचना चाहिए।
आईएएनएस: वेस्ट एशिया के मौजूदा हालात और इसके लंबे समय के असर को आप कैसे देखते हैं?
यूसुफ अब्देलघानी: सबसे पहले, हम ईरान जो कर रहा है, उसकी निंदा करते हैं। ईरान खाड़ी देशों, इंफ्रास्ट्रक्चर, तेल के ठिकानों, और तेल के मैदानों को टारगेट कर रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रहा है... हम इसकी निंदा करते हैं और साथ ही ईरान जॉर्डन में हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी टारगेट कर रहा है। हमने शुरू से ही कहा है कि जॉर्डन इन दुश्मनी का हिस्सा नहीं है। जॉर्डन किसी भी देश को अपने मिलिट्री बेस या अपनी जमीन या एयर स्पेस का इस्तेमाल किसी दूसरे देश को टारगेट करने के लिए नहीं करने देगा। इसलिए, हमने ईरानियों को शुरू से ही इस बारे में बताया था, लेकिन बदकिस्मती से उनके अपने तनाव और अपने विचार हैं और हमने यह भी सबको बता दिया है कि हमारे देश में कोई विदेशी बेस नहीं है और हमारे एयर बेस जॉर्डन फर्स्ट आर्मी द्वारा चलाए और कंट्रोल किए जाते हैं और हमारे देश में किसी भी तरह के विदेशी सैनिक नहीं हैं। जैसा कि हाल ही में जॉर्डन के उप प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री ने कहा था, हमारे पास विदेशी कंसल्टेंट हैं जो तीन काम करते हैं - आतंकवाद, ड्रग ट्रैफिकिंग और हथियारों की स्मगलिंग से लड़ने में हमारी मदद करना।
सीरियाई गृह युद्ध और आईएसआईएस के उदय के दौरान, हम पूरी दुनिया की तरफ से आतंकवाद से लड़ने में सबसे आगे थे। इसलिए, हम जो कर रहे थे, उसके लिए पूरी दुनिया को हमारा शुक्रिया अदा करना चाहिए। आपको याद होगा कि हमारे बॉर्डर के पास एकमात्र बेस सीरियाई बॉर्डर में अल-तन्फ बेस था, और हम वहां एक रिफ्यूजी कैंप देते थे और लॉजिस्टिक्स देते थे। इन झगड़ों की वजह से जॉर्डन पर भारी बोझ पड़ा। मैं अपने देश को जलते हुए समुद्र के बीच शांति का नखलिस्तान कह सकता हूं। संघर्ष ने हमें घेरे रखा, लेकिन हम हमेशा शांतिपूर्ण रहे हैं। लेकिन, इन संघर्षों के नतीजों ने हम पर असर डाला; हमने हर जगह से रिफ्यूजी देखे। फिलिस्तीन से, हमें 1948 और 1967 में, इराकी सिविल वॉर से हमें दस लाख से ज्यादा रिफ्यूजी मिले। और सीरिया से भी, हमें डेढ़ लाख से अधिक रिफ्यूजी मिले। उनमें से कई अभी भी हमारे देश में हैं। तो, जॉर्डन इस इलाके में और उससे आगे शांति के लिए मदद करने और शांति को बढ़ावा देने के लिए है, और हम इस तरह से पूरी दुनिया की मदद कर रहे हैं। हम आतंकवाद, ड्रग ट्रैफिकिंग, और हथियारों की ट्रैफिकिंग से लड़ रहे हैं। ये सब हमारा देश कर रहा है, और पूरी दुनिया को इसके लिए हमें धन्यवाद देना चाहिए।
आईएएनएस: क्या आप ईरान के इस बयान पर यकीन करते हैं कि उसके पास परमाणु बम नहीं है?
यूसुफ अब्देलघानी: हम मिडिल ईस्ट में हैं और मुझे लगता है कि ईरान अप्रसार संधि का हिस्सा है और अप्रसार संधि के तहत परमाणु हथियारों के प्रसार के खिलाफ हैं... हम चाहते हैं कि मध्य-पूर्व को परमाणु हथियारों से मुक्त होना चाहिए, जिसमें इजरायल भी शामिल है।
आईएएनएस: क्या आपको लगता है कि ईरान, यूएस और इजरायल के बीच शांति मुमकिन है या यह झगड़ा जारी रहेगा?
यूसुफ अब्देलघानी: नहीं, हमारा मानना है कि समझदारी से काम लेना चाहिए और संघर्ष से और संघर्ष बढ़ता है... क्योंकि हम इस इलाके में हैं, हमने देखा है कि... एक देश में जो हुआ उसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ेगा। देखिए क्या हुआ है... इस संघर्ष के दौरान, सभी खाड़ी देश प्रभावित हुए, उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। आप बुनियादी ढांचों को क्यों निशाना बना रहे हैं? आप घरों, सरकारी दफ्तरों, तेल के खेतों में उत्पादन, तेल के कुओं, बंदरगाहों को क्यों निशाना बना रहे हैं? इन सबका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। इसलिए, जंग इसका जवाब नहीं है। इसका जवाब शांति और बातचीत है और जंग इस इलाके के सभी लोगों के लिए तकलीफ और दुख लाती है। इसी वजह से, हम अपने इलाके के मुख्य मुद्दे को भी सुलझाने के लिए कह रहे हैं, जो कि फिलिस्तीनी मुद्दा या फिलिस्तीनी-इजरायली झगड़ा है। यह झगड़ा हमारे इलाके का मुख्य झगड़ा है। अगर यह झगड़ा नहीं सुलझा, अगर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी इस झगड़े को सुलझाने में हमारी मदद नहीं करेगी, तो हिंसा का सिलसिला चलता रहेगा। कई समूह या संगठन फिलिस्तीनी मुद्दे का इस्तेमाल हमारे इलाके में हिंसा करने या हिंसा भड़काने के बहाने के तौर पर करेंगे। तो, हमारे इलाके में जो मुख्य मुद्दा हल होना चाहिए, वह फिलिस्तीन का है। यह इजरायल का काम है कि वह फिलिस्तीनियों को उनके अधिकार और आजादी दे और उनकी जमीन, 1967 में कब्जाई जमीन पर उन्हें अपना देश बनाने और खुद फैसला करने का अधिकार दे। नहीं तो, अगर यह लड़ाई नहीं सुलझी, तो हिंसा का सिलसिला चलता रहेगा।
आईएएनएस: जॉर्डन ईरान के खाड़ी देशों को टारगेट करने को कैसे देखता है?
यूसेफ अब्देलघानी: उन्होंने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि हम यूनाइटेड स्टेट्स को ईरान को टारगेट करने के लिए अपने मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देते। लेकिन, ईरान ने फिर भी उन्हें निशाना बनाया और यह ठीक नहीं है। वे न सिर्फ मिलिट्री बेस बल्कि ऑयल फील्ड जैसे सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाने पर ले रहे हैं। इसलिए, इसकी बुराई होनी चाहिए। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। हम ईरानियों के साथ बहुत मजबूत और ठोस रिश्ते चाहते हैं। ईरानी हमारे भाई हैं, और हम सदियों से इस इलाके में हैं। हम शांति और भाईचारे से रह रहे हैं। इसलिए, यह मंजूर नहीं है... ईरान के प्रति हमारी कोई दुर्भावना नहीं है या हम सरकार बदलना चाहते हैं या सरकार बदलने की मांग करते हैं या कुछ भी मांगते हैं। हम इसका समर्थन नहीं करते, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि ईरान हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेगा।
आईएएनएस: क्या जॉर्डन के वरिष्ठ नेता जल्द ही भारत आने का प्लान बना रहे हैं?
यूसुफ अब्देलघनी: बिल्कुल! पिछली फरवरी में, महारानी रानिया भारत आई थीं। यह एक उच्चस्तरीय दौरा थी। मुझे लगता है कि यह एक्सचेंज विजिट उनमें से एक है जिन पर प्रधानमंत्री मोदी की जॉर्डन यात्रा के दौरान सहमति बनी थी और महारानी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच रिश्ते बहुत मजबूत हैं। वे नियमित रूप से उन्हें कॉल करती हैं और दोनों बातचीत करते हैं। पिछली दो फोन कॉल प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे ठिकानों को निशाना बनाया जाने के बाद किया था। उन्होंने इसको लेकर फिक्र जाहिर की थी। जॉर्डन में 20,000 से अधिक भारतीय रहते हैं। हम जॉर्डन में उनका अच्छे से ख्याल रख रहे हैं। जॉर्डन भारत की खाद्य सुरक्षा में उर्वरक और फॉस्फेट जैसे कच्चे माल की आपूर्ति के जरिए अहम भूमिका निभाता है। इसलिए, हम मजबूत, सुदृढ़ रिश्ते बनाने को उत्सुक हैं। हम नियमित दौरों को लेकर उत्सुक हैं। भविष्य में हम अपने रिश्तों को और बढ़ते-संवरते देखना चाहते हैं।
--आईएएनएस
केआर/
