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जम्मू-कश्मीर के एलजी ने अनंतनाग में हेरिटेज और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी

श्रीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को अनंतनाग जिले में हेरिटेज और संस्कृति को बचाने से जुड़ी कई पहलों की आधारशिला रखी।
 

श्रीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को अनंतनाग जिले में हेरिटेज और संस्कृति को बचाने से जुड़ी कई पहलों की आधारशिला रखी।

उप-राज्यपाल ने समाधि प्रतिष्ठा दिवस, नाग पंचमी महोत्सव और यज्ञ की पूर्णाहुति के मौके पर अनंतनाग में श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम का दौरा किया।

उन्होंने आश्रम के प्रति सम्मान व्यक्त किया, जिसने ऋषियों-मुनियों के ज्ञान को संजोकर रखा है, और स्वामी अशोकानंद जी महाराज को श्रद्धांजलि दी।

1937 में महाराज के दूरदर्शी संकल्प को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह आश्रम एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र बन गया, जिसने समाज की वास्तविक जरूरतों को पूरा करते हुए सनातन धर्म के शाश्वत संदेश को आगे बढ़ाया।

उप-राज्यपाल ने कहा कि सेवा, अनुशासन और समर्पण की उनकी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है। जब स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने 1971 में अपना नश्वर शरीर त्यागा, तो वे सेवा, साधना और समर्पण की एक जीवंत परंपरा छोड़ गए, जिसे आज भी इस आश्रम की हर गतिविधि में महसूस किया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सभ्यता ने हमेशा आध्यात्मिकता और प्रकृति को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना है। उन्होंने ईशोपनिषद का हवाला देते हुए लोगों को याद दिलाया कि ईश्वर पूरी सृष्टि में व्याप्त हैं।

वैश्विक जलवायु चुनौतियों के संदर्भ में, उन्होंने युवाओं से नदियों, जंगलों, जानवरों और सभी जीवित प्राणियों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया, ताकि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

आश्रम में शुरू की गई नई पहलों पर प्रकाश डालते हुए उपमहााध्यक्ष ने कहा कि ये परियोजनाएं आस्था को कर्म में परिवर्तित करने का प्रतीक हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता का अर्थ है विश्व के प्रति जिम्मेदारी, जिसे निस्वार्थ सेवा के माध्यम से निभाया जाता है।

भगवद् गीता से उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि जब कर्म सेवा बन जाता है और सेवा समर्पण बन जाती है, तो साधारण कार्य साधना बन जाता है।

उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, निर्भीकता और निस्वार्थ सेवा के संदेश से प्रेरणा लेने का आग्रह किया और उन्हें याद दिलाया कि सच्ची शक्ति भीतर ही निहित है और प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।

विविधता में एकता के भारत के दर्शन को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भारत की शक्ति विविधता का सम्मान करते हुए एक साथ आगे बढ़ने में निहित है।

--आईएएनएस

एमएस/