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जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने नकली सर्विस बुक और जाली आदेश मामले में चार्जशीट दाखिल की

श्रीनगर, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की कश्मीर विंग ने शनिवार को बताया कि उसकी इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (पीडीडी) में फर्जी सर्विस बुक और जाली आदेशों से जुड़े घोटाले के मामले में एक आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
 
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने नकली सर्विस बुक और जाली आदेश मामले में चार्जशीट दाखिल की

श्रीनगर, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की कश्मीर विंग ने शनिवार को बताया कि उसकी इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (पीडीडी) में फर्जी सर्विस बुक और जाली आदेशों से जुड़े घोटाले के मामले में एक आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।

क्राइम ब्रांच कश्मीर के एक बयान में कहा गया है कि क्राइम ब्रांच जम्मू-कश्मीर की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू), श्रीनगर ने एफआईआर नंबर 46/2023 में एंटी-करप्शन कोर्ट, बारामूला के सामने चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट कुनान बाबागुंड, बांदीपोरा के नासिर अहमद मीर; अरागम, बांदीपोरा के मुश्ताक अहमद मलिक (केपीडीसीएल में सरकारी कर्मचारी); और केपीडीसीएल/ईडी सुंबल के एक दिवंगत पूर्व एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (जो जम्मू के निवासी थे) के खिलाफ दाखिल की गई है।

बयान में कहा गया है कि यह मामला एक लिखित शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (पीडीडी) में फर्जी नियुक्तियों का आरोप लगाया गया था।

जांच के दौरान पता चला कि नासिर अहमद मीर ने एक जाली नियुक्ति आदेश का इस्तेमाल करके नौकरी हासिल की थी, जिसे कथित तौर पर 1994 के एसआरओ-43 के तहत जारी किया गया था।

जांच में पाया गया कि वह आदेश सरकारी रिकॉर्ड से गायब था, जिससे उसकी प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा हो गया। जांच में आगे पता चला कि मुश्ताक अहमद मलिक, जो उस समय सीनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थे, ने नासिर अहमद मीर के लिए एक जाली सर्विस बुक तैयार की थी, जिसमें गलत तरीके से यह दिखाया गया था कि उनकी नियुक्ति एसआरओ-43 के तहत हुई है।

फोरेंसिक जांच से इस बात की पुष्टि हुई कि सर्विस बुक में की गई प्रविष्टियां मुश्ताक अहमद मलिक द्वारा ही लिखी और हस्ताक्षरित की गई थीं। इसके अलावा, कथित नियुक्ति आदेश जारी होने के संबंध में कोई भी सरकारी डिस्पैच या रसीद का रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। उस समय के तहसीलदार, बांदीपोरा द्वारा किए गए सत्यापन से इस बात की पुष्टि हुई कि नासिर अहमद मीर एसआरओ-43 के तहत नियुक्ति के लिए पात्र नहीं थे, क्योंकि उनके परिवार की ऐसी कोई परिस्थितियां नहीं थीं जो उन्हें इसके लिए योग्य बनातीं।

इसके बावजूद, दिवंगत एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने 2009 में, कथित नियुक्ति की तारीख के तीन साल से भी अधिक समय बाद, बिना किसी उचित सत्यापन के वेतन जारी करने में मदद की।

जांच में आरोपियों के बीच एक आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी पद के दुरुपयोग जैसे कृत्य शामिल थे। तदनुसार, आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 420, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराधों के साथ-साथ, इसमें शामिल सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत भी आरोप तय किए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि चार्जशीट को न्यायिक निर्णय के लिए अदालत में जमा कर दिया गया है।

--आईएएनएस

एससीएच