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झारखंड आंदोलन: राज्य सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही

रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड सरकार और राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच रविवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही, हालांकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अधिकांश मांगें स्वीकार करने का दावा किया।
 

रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड सरकार और राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच रविवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही, हालांकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अधिकांश मांगें स्वीकार करने का दावा किया।

प्रदर्शनकारियों की मांगों के प्रति अपने उदार दृष्टिकोण का हवाला देते हुए हेमंत सोरेन सरकार ने उनसे आंदोलन समाप्त करने का आह्वान किया।

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (जेएसएससी सीजीएल 2024) को रद्द करने और विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई सभी अनियमितताओं की सीबीआई जांच की अपनी मांग पर अडिग रहे।

अपनी मांगों पर जोर देने और आंदोलन की गति बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को राज्य विधानसभा तक मार्च करने के अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद चर्चा करने के लिए गठित चार मंत्रियों के समूह ने आम सहमति न बन पाने पर निराशा व्यक्त की।

सूचना भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने छात्रों की अधिकांश मांगें मान ली हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है, जिसे उन्होंने 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपनी हठधर्मिता छोड़ने, आंदोलन वापस लेने और मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की।

उन्होंने छात्रों के अभिभावकों से भी उन्हें आंदोलन रोकने के लिए मनाने की अपील की।

मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और 2023-2025 की सिविल सेवा परीक्षा के लंबित मामलों को रद्द करने पर सहमत हो गई है।

इसके अलावा, सरकार परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के वित्तीय पहलुओं की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के साथ शामिल करने की सिफारिश करने पर भी सहमत हो गई है।

मंत्री ने कहा कि विवादित एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित अन्य सभी परीक्षाओं की भी व्यापक जांच करने पर सहमति बनी है और यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग पर सुदिव्या कुमार ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी और इसके आधार पर नियुक्तियां पहले ही हो चुकी हैं, इसलिए इसे रद्द करना सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

हालांकि सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में मामले की जांच कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन छात्रों ने इस पर सहमति नहीं जताई।

--आईएएनएस

एमएस/