जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया: कर्नाटक भाजपा
दावनगेरे (कर्नाटक), 31 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस सरकार द्वारा कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं में हिंदी को अनिवार्य उत्तीर्ण विषय न बनाने के फैसले की निंदा करते हुए कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने हिंदी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित किया था।
वरिष्ठ भाजपा नेता और कर्नाटक में विपक्ष के नेता (एलओपी) आर. अशोक ने दावनगेरे में दावनगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के लिए पार्टी का घोषणापत्र जारी करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।
कर्नाटक में तीन-भाषा सूत्र का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता अशोक ने पूछा कि इसे किसने लागू किया और बताया कि महात्मा गांधी ने 30 वर्षों तक हिंदी प्रचार सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था, जबकि पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने हिंदी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित किया था।
उन्होंने टिप्पणी की, "महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने का विरोध करने वाले अब चुप हैं जब हिंदी को अनिवार्य नहीं बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर देना चाहिए था कि हिंदी अनिवार्य नहीं है, न कि परीक्षाओं के दौरान।
इससे पहले, विपक्ष के नेता अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के इस फैसले से छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय कन्नड़ प्रेम से प्रेरित नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है।
विपक्ष के सांसद अशोक ने कहा कि कर्नाटक शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी स्कूलों से अचानक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में हटा दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब छात्र परीक्षा दे रहे हैं। लाखों छात्रों ने हिंदी को एक विषय के रूप में पढ़ा और उसकी तैयारी की है। इस अचानक उठाए गए कदम से एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
--आईएएनएस
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