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जापानी लॉ मेकर्स ने बेंगलुरु में इसरो और आईआईएससी का किया दौरा, भारत-जापान साझेदारी को मिलेगी मजबूती

बेंगलुरु, 20 सितंबर (आईएएनएस)। जापानी लॉ मेकर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत-जापान विजिट प्रोग्राम के तहत बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का दौरा किया।
 

बेंगलुरु, 20 सितंबर (आईएएनएस)। जापानी लॉ मेकर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत-जापान विजिट प्रोग्राम के तहत बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का दौरा किया।

जापान में भारतीय दूतावास ने रविवार को बताया कि यह दौरा दोनों देशों के बीच चल रहे गहरे सहयोग और भविष्य की संभावनाओं को दिखाता है।

भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर लिखा, "यह भारत-जापान विजिट प्रोग्राम बेंगलुरु से शुरू हुआ, जहां लॉ मेकर्स ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का दौरा किया। एआई, तकनीक, अंतरिक्ष, रक्षा और स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक वैश्विक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है और यह आदान-प्रदान चल रहे सहयोग की गहराई और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है।"

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने भी 'एक्स' पर पोस्ट करके इस दौरे की जानकारी दी। बीईएल ने लिखा, "जापान के पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री तारो कोनो के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जापानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने 19 सितंबर 2026 को बीईएल बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। यह दौरा भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम (डीवीपी) के तहत समन्वित किया गया था।"

भारत का दौरा करने वाले जापानी लॉ मेकर्स में तारो कोनो, करेन मकिशिमा, केंजी नाकानिशी और साको यामामोटो शामिल हैं।

भारतीय दूतावास ने बताया, "भारत-जापान विजिट प्रोग्राम के तहत, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के जापानी लॉ मेकर्स, जिनमें प्रतिनिधि तारो कोनो, प्रतिनिधि करेन मकिशिमा, प्रतिनिधि केंजी नाकानिशी और प्रतिनिधि साको यामामोटो शामिल हैं, इस हफ्ते भारत का दौरा कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सांसदों को भारत में नवीनतम विकास के बारे में जानकारी देना, उन्हें स्थानीय स्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव कराना और संबंधित हितधारकों के साथ सीधे बातचीत के अवसर प्रदान करना है।"

पिछले महीने जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे, इस दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद कोइजुमी ने कहा था कि वह चर्चाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए अपना पूरा प्रयास करेंगे।

कोइजुमी ने कहा था, "जब बैठक समाप्त हुई, तो रक्षा मंत्री सिंह ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'यह बहुत ही फलदायी बैठक थी।' हम जापान-भारत रक्षा सहयोग में तेजी लाने में एक नई शुरुआत करने में सक्षम हुए। आगे बढ़ते हुए, मैं अपने व्यक्तिगत विश्वास के रिश्ते को और मजबूत करने के लिए आज की चर्चाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए अपना पूरा प्रयास करूंगा।"

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों मंत्रियों ने वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल के आकलन को साझा करने के महत्व पर जोर दिया था।

जुलाई 2026 में जारी जापान-भारत संयुक्त बयान को याद करते हुए, दोनों ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत को साकार करने के लिए रक्षा सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की थी। दोनों मंत्री समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक और प्रभावी तरीके से परिचालन सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए थे और उन्होंने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम