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'जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है', जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सोमवार को नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी के त्रिपक्षीय दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा।
 
'जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है', जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सोमवार को नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी के त्रिपक्षीय दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा।

राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए पाटिल ने जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन प्राप्त करने के लिए जल अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर सरकार, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स से जुड़े 500 हितधारकों के बीच चर्चा शुरू की।

कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और अंतरिक्ष विभाग के सचिव एवं इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन, एएनआरएफ के सीईओ; वरिष्ठ सचिव, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और देश भर के उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए पाटिल ने इस बात पर जोर दिया कि 'जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है।'

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उभरती जल चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी के त्रिपक्षीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

मंत्रालय द्वारा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने बताया कि जल क्षेत्र में 315 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें मंत्रालय द्वारा सीधे समर्थित 113 परियोजनाएं शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान की सफलता पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत देश भर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं की स्थापना की गई है।

उन्होंने जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (जेएसजेबी:सीटीआर) पोर्टल के शुभारंभ की घोषणा की, जो नागरिकों, उद्योगों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों की भागीदारी के माध्यम से समुदाय-आधारित जल संरक्षण को और मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक राष्ट्रव्यापी पहल है।

उन्होंने वैज्ञानिक जल प्रबंधन और जल स्रोतों की स्थिरता को बढ़ावा देने में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और साझेदारियों की भूमिका पर भी बल दिया।

जितेंद्र सिंह ने विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को शामिल करते हुए समग्र सरकारी और राष्ट्रीय स्तर के दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया।

--आईएएनएस

एमएस/