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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का सिएटल एडिशन शुरू, पढ़ने की अहमियत और मानवीय कल्पना पर चर्चा

सिएटल, 19 सितंबर (आईएएनएस)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के सिएटल संस्करण के तीसरे आयोजन की शुरुआत पढ़ने, मानवीय कल्पना और साहित्य की भूमिका के बचाव के साथ हुई। लेखकों, जनप्रतिनिधियों और राजनयिकों ने इस बात पर चर्चा की कि किस तरह कहानियां अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने का दम रखती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बदलते दौर में भी किताबें और साहित्य मानव अनुभव को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।
 

सिएटल, 19 सितंबर (आईएएनएस)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के सिएटल संस्करण के तीसरे आयोजन की शुरुआत पढ़ने, मानवीय कल्पना और साहित्य की भूमिका के बचाव के साथ हुई। लेखकों, जनप्रतिनिधियों और राजनयिकों ने इस बात पर चर्चा की कि किस तरह कहानियां अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने का दम रखती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बदलते दौर में भी किताबें और साहित्य मानव अनुभव को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।

सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित कार्यक्रम में भारत की साहित्यिक परंपराओं और अमेरिका के एक प्रमुख प्रौद्योगिकी केंद्र से जुड़े सवालों को एक मंच पर लाया गया। वक्ताओं ने स्मृतियों को सहेजने, सहानुभूति विकसित करने और बच्चों के जीवन में किताबों की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक के कारण लोगों के सीखने और जानकारी हासिल करने के तरीके बदल रहे हैं, लेकिन मानवीय अनुभव को समझने में साहित्य की भूमिका बनी हुई है।

सिएटल की मेयर कैटी विल्सन ने जयपुर के ‘पिंक सिटी’ और सिएटल के ‘एमराल्ड सिटी’ के मिलन के रूप में इस आयोजन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी इस आयोजन की शुरुआत के लिए बिल्कुल उपयुक्त जगह है, क्योंकि यह शहर के ऐसे स्थान की तरह है, जहां लोग एक साथ आते हैं।

विल्सन ने कहा, “सिएटल मूल रूप से पाठकों का शहर है।”

उनके मुताबिक जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल बहुत कम समय में सिएटल की सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा बन गया है और इसने पूरे पैसिफिक नॉर्थवेस्ट से लेखकों, कलाकारों, विद्वानों, छात्रों और साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों को एक मंच पर लाया है।

उन्होंने कहा, “इस तरह के महोत्सव हमें याद दिलाते हैं कि कहानियां हमें एक-दूसरे से जोड़ती हैं। वे पुल बनाती हैं।”

विल्सन ने कहा कि साहित्य के जरिए व्यक्ति अपने अनुभवों से बाहर निकलकर दूसरे लोगों के जीवन को समझने और उन संभावनाओं की कल्पना करने की कोशिश करता है, जो शायद उसके लिए अपरिचित हों।

उन्होंने कहा, “ऐसे कमरे में, जहां सीटें खुली हों और दिमाग खुले हों, हमें सहानुभूति का अभ्यास करने का अवसर मिलता है।”

सिएटल की मेयर ने एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई और सवाल उठाया कि इसका पढ़ने, ध्यान केंद्रित करने तथा लिखने और सोचने की क्षमता पर क्या असर पड़ सकता है।

उन्होंने माना कि सिएटल की स्थिति इस मामले में जटिल है। शहर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ा है और यहां ऐसी कंपनियां एआई उपकरण विकसित कर रही हैं, जिनसे मानवता को बड़े लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, तीन साल के बच्चे की मां के रूप में विल्सन ने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता भी है कि आज के बच्चे जिस दुनिया में बड़े होंगे, वह उनके अपने बचपन की दुनिया से काफी अलग होगी।

उन्होंने याद किया कि किस तरह पढ़ने ने उन्हें अपने अनुभवों की सीमाओं से बाहर निकलने और दूसरे देशों या इतिहास के दूसरे दौर में रहने वाले लोगों को समझने में मदद की।

उन्होंने सवाल उठाया कि तकनीकी बदलाव के बीच बच्चे ऐसी क्षमताएं किस तरह विकसित करेंगे। उनके मुताबिक इसी वजह से साहित्य, लेखन और पढ़ने के प्रति सार्वजनिक प्रतिबद्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

विल्सन ने महोत्सव में आए लोगों से अपनी पसंद के सत्रों में शामिल होने, नए लोगों से मिलने और किताबों की सिफारिशों का आदान-प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग महोत्सव से कुछ ऐसा लेकर जाएंगे, जिसे वे आयोजन खत्म होने के बाद भी अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।

सिएटल में भारत के महावाणिज्यदूत प्रकाश गुप्ता ने इस आयोजन को अमेरिका में भारतीय संस्कृति और भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती मौजूदगी की व्यापक कहानी से जोड़ा।

गुप्ता ने नवंबर 2023 में सिएटल पहुंचने के अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि उन्होंने एक होटल में कॉफी पर महोत्सव के आयोजकों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारतीय वाणिज्य दूतावास और सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की पहल लगभग एक ही समय में अपनी यात्रा शुरू कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष उस समय यह तय करने की प्रक्रिया में थे कि अपनी-अपनी पहलों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, लेकिन दोनों में शुरुआत करने का समान संकल्प था।

गुप्ता ने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल को सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में इतने बड़े आयोजन के रूप में विकसित होते देखना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने इसे भारत और सिएटल की प्रतिभाओं और विचारों को एक साथ लाने वाला मंच बताया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के अलग-अलग शहरों में इस महोत्सव का विस्तार भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते आकार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उसके योगदान को भी दर्शाता है।

गुप्ता ने उन राजनयिकों की भागीदारी का भी स्वागत किया, जिन्होंने लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। भारतीय विदेश सेवा के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में लेखन के माध्यम से वरिष्ठ सहयोगियों से दोबारा जुड़ने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि कला भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे लोगों तक पहुंचने की क्षमता रखती है।

गुप्ता ने कहा, “सिएटल में इस सप्ताहांत भारत की एक झलक लाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

महोत्सव की ओर से बोलते हुए संजय रॉय ने दर्शकों से यह सवाल करने को कहा कि तकनीक से इतने गहरे तौर पर जुड़े शहर में साहित्य, पुस्तकालय और कला क्यों महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि सभ्यताओं के उत्थान और पतन के बावजूद कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति बनी रहती है। उनके मुताबिक पुस्तकालय मानव अनुभव के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का काम करते हैं।

रॉय ने कहा, “ये वे संस्थान हैं जो स्मृति को सहेजकर रखते हैं।”

उन्होंने कहा कि कहानियां लोगों को जोड़ती हैं और समुदायों के निर्माण में मदद करती हैं। साहित्यिक आयोजन लोगों को अलग-अलग संस्कृतियों, दर्शन, खान-पान और जीवन जीने के तरीकों से परिचित होने का अवसर देते हैं।

रॉय के मुताबिक इन विविधताओं को समझना अज्ञानता और गलत धारणाओं को कम करने में मदद कर सकता है और इससे नफरत तथा हिंसा जैसी समस्याओं से निपटने में भी सहायता मिल सकती है।

उन्होंने दर्शकों से इस प्रयास को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लेने का आग्रह किया।

रॉय ने कहा, “हमें आगे बढ़कर इस प्रयास का हिस्सा बनना होगा। हमें बदलाव लाना होगा।”

उन्होंने इस आयोजन को “उम्मीद का एक जमावड़ा” बताया।

कनाडाई उपन्यासकार यान मार्टेल ने अपने मुख्य भाषण में अनिश्चित दौर में कहानियों और कल्पना की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहानी कहने की परंपरा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा और मौखिक परंपराओं, नाटकों, कविताओं, गीतों, चित्रों और संगीत का भी उल्लेख किया।

मार्टेल ने कहा कि मनोरंजन किसी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन उसका उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होता।

उन्होंने ट्रोजन युद्ध की कथाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि कहानियां सदियों तक जीवित रह सकती हैं और किसी समाज की अपनी पहचान को समझने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि एकिलीज, हेलेन और ओडीसियस जैसे पात्र आज भी लोगों के लिए परिचित हैं, भले ही उन्होंने होमर की मूल रचनाएं न पढ़ी हों।

महोत्सव के आयोजकों ने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले दानदाताओं, प्रायोजकों, स्वयंसेवकों और साझेदारों का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन सभी के सहयोग से लेखकों को सिएटल लाने और उनके लेखन को नए पाठकों तक पहुंचाने में मदद मिली।

आयोजकों के मुताबिक साहित्यिक महोत्सव उस अनुभव को निजी दायरे से निकालकर सार्वजनिक संवाद में बदल देते हैं, जो आम तौर पर एक व्यक्ति के अकेले किताब पढ़ने से शुरू होता है। ऐसे आयोजन अलग-अलग लोगों को एक साथ बैठकर विचारों और अनुभवों पर बातचीत करने का अवसर देते हैं।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का सिएटल संस्करण भारत से शुरू हुई। इसकी अंतरराष्ट्रीय विस्तार यात्रा का हिस्सा है। इसके कार्यक्रम में स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेखकों और विचारकों को शामिल किया गया है। सिएटल में मुख्य आयोजन से पहले पिछली शाम एक गैलरी में उद्घाटन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।

यान मार्टेल ‘लाइफ ऑफ पाई’ के लेखक हैं, जिसके लिए उन्हें 2002 में बुकर पुरस्कार मिला था। उनके मुख्य भाषण ने विश्वास और कल्पना जैसे विषयों पर लिखने वाले उपन्यासकार के नजरिए को ऐसे साहित्यिक आयोजन के केंद्र में रखा, जहां साहित्य की सार्वजनिक भूमिका और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कहानी कहने की परंपराओं के बीच संबंधों पर चर्चा हुई।

--आईएएनएस

केआर/