आंध्र प्रदेश: जगन ने सीएम चंद्रबाबू को 'डीएससी' और 'ग्रुप-आई' दोनों परीक्षाओं की सीबीआई जांच की चुनौती दी
अमरावती, 20 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को डीएससी 2025 और एपीपीएससी ग्रुप-आई परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच का आदेश देने की चुनौती दी।
वाईएसआरसीपी शासनकाल में आयोजित 'ग्रुप-आई' परीक्षा की जांच के लिए अपनी पार्टी की तत्परता जताते हुए उन्होंने पूछा कि क्या टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार डीएससी मामले की भी उसी तरह से जांच कराने को तैयार है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि गठबंधन द्वारा लगाए गए आरोपों के विपरीत, एपीपीएससी 2018 की परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गईं, जिससे किसी भी प्रकार के गबन की कोई गुंजाइश नहीं रही।
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, 'डी एससी' का संचालन प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर भर्ती तक, हर कदम पर संदिग्ध रहा है।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने दावा किया कि चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे तथा शिक्षा मंत्री नारा लोकेश दोनों ने विधानसभा में अनियमितताओं को स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को परिषद में उठने नहीं दिया।
विपक्ष के नेता को दर्जा न दिए जाने के विरोध में वाईएसआरसीपी विधानसभा का बहिष्कार कर रही है, जबकि पार्टी परिषद की कार्यवाही में भाग ले रही है।
डीएससी में कथित अनियमितताओं का विस्तृत विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र तैयार करने और डीएससी परीक्षा आयोजित करने का काम एक ही संस्था को सौंपा गया था, जिससे भ्रष्टाचार और प्रश्नपत्र लीक होने का रास्ता खुल गया।
इसी तरह आउटसोर्सिंग कर्मचारी नवीन को प्रश्नपत्र तक पहुंच मिली और उसने अंक सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। मामला सामने आने पर दूसरी मेरिट सूची से उसका नाम हटा दिया गया और उसने अदालत में याचिका दायर कर अपने नाम हटाए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि खेल कोटा में सरकार ने दो सरकारी आदेश जारी कर नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को डीएससी परीक्षा देने से छूट दी थी। पसंदीदा लोगों को भर्ती करने के बाद, पहले के आदेशों को रद्द करते हुए दो और सरकारी आदेश जारी करके दरवाजे बंद कर दिए गए। इस प्रक्रिया में, 372 लोगों को नौकरियां मिलीं और सरकार ने यह कहकर कमजोर बचाव किया कि चूंकि हमने पीवी सिंधु को नौकरी दी है, इसलिए खेल कोटा में अन्य लोगों पर भी यही नियम लागू होते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती किए गए 372 लोगों में से किसी ने भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं खेले हैं और राष्ट्रीय खेलों में तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाले व्यक्ति को भी नौकरी नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि नौकरी की खरीद-फरोख्त से संबंधित ऑडियो क्लिप वायरल हुए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसीलिए सीबीआई द्वारा डीएससी की जांच होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि यह मूल्यांकन एपीपीएससी कार्यालय और शिक्षण संस्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में किया गया था। मूल्यांकन अव्यवस्थित तरीके से किया गया था और बार कोड का उपयोग किया गया था, जिससे मूल्यांकनकर्ता को उम्मीदवार के बारे में जानने का कोई अवसर नहीं मिला।
--आईएएनएस
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